जानें…आपके बच्चे हीन भावना के शिकार तो नहीं?

904
0
SHARE

डा.मनोज कुमार.

शमशाद धूप से बचना चाह रहा।वह सङक किनारे लगे पेड़ की आड़ लिए चला जा रहा।रह-रह कर उसके जेहन में आज अपनी जलालत याद आ रही थी।वह सब का जवाब दे सकता था।पता नही क्यों वह अपनी बेइज्जती बर्दाश्त करता रहा।बचपन में भी वह दुसरे की करनी की सजा खुद पाता रहा।

जब स्कूल में था तब टीचर की किच-किच‌‌।हमेशा शिकायत वह सवाल नही पूछता‌।पूछने पर जवाब नही देता।उसके अब्बू हमेशा उसे ताने दिया करते ।नकारा, नासमझ,बुरबक और न जाने क्या- क्या उपनाम मिले।

शमशाद जब किशोरावस्था में रहा ।तब जोया की ओर भी मुखातिब रहा।जोया व शमशाद एक दुसरे को पसंद करते रहे।जोया बात बात में उसके नजदीक आने की कोशिश करती।हर बार वह इस डर से जोया से दूर रहा।वह तो उतना सुंदर नही जितनी खूबसूरती जोया में है।वह परी जैसी बड़ी बड़ी आंखों वाली।सुनहरे काले बाल ।जोया जब हंसती तब उसके गालों मे डिम्मल आते।शायद यही क्यूटपन की वजह थी-शमशाद के रिझने की‌।

पर वह कभी भी खुद को उसके लायक नहीं समझा।बचपन से ही वह खुद को नकारा समझ गया।पढाई में ठीक था पर आज वह अपनी खूबियो को समझ नही पा रहा।वह कभी भी समाजिक उत्सव में भाग नही लेता।जब घर में अतिथि आते तब वह जानबूझकर सोने का नाटक करता।कई बार वह खुद को कमरे में कैद कर लेता।घुटन,मलाल में रहकर जिता रहा और आज आफिस में लोगों की बात पर चुपके-चुपके सिसकियां लेना आदत मे शुमार हो चुका है।वह अपनी इन आदतों की वजह से कई बार अच्छी नौकरी में चयन के बावजूद इंटरव्यू मे छंटता रहा।आज वह अनचाहे काम को करता रहा।न जाने कितने अनचाहे दर्द के साथ।

दरअसल,शमशाद में तमाम अच्छाई रहते हुए भी वह खुद के प्रति दीन-हीन विचारधारा रखता रहा।पटना में मेरे पास जब वह आया तो जिंदगी से पुरी तरह निराश-हताश था।लगातार कुछ काउंसलिंग के बाद उसकी तबीयत उम्दा हुयी।

दरअसल,व्यक्तित्व का विकास बचपन से ही शुरू हो जाता है ।इसी विकासक्रम में अगर इंसान को नकारात्मक परिस्थितियों से गुजारना पङे,उसकी भावनात्मक विकास में रोड़ा उसके परिवार बनने लगे तब व्यक्ति इनफिरिटि कॉम्पलेक्स का शिकार हो जाता है।इस समस्या से ग्रसित इंसान खुद को नकारा व अनुपयोगी समझता है।नतीजतन वह ईश्वर की दी हुयी  खूबियो को पहचान नही पाता।वह अपने आप मे इस कदर परेशान रहता है कि वह अपने परिवार, समाज व काम-धंधे को पूरी तरह बर्बाद देखता है‌।हौसले पस्त होने की वजह से वह सधारण काम को भी अमान्य करार देता है।इनसब का असर उसके कामयाबी के  ग्राफिक्स पर आप सीधे देख सकते हैं।

(लेखक डा.मनोज कुमार, पटना में काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट है। इनका संपर्क नं 8298929114,9835498113 है।)

LEAVE A REPLY