संवाददाता।मोतिहारी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सुगौली परिसर में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
रविवार को हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एम. ए. अशद ने की। शिविर का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के दुष्परिणामों और उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर लोगों को जागरूक करना था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से पैनल अधिवक्ता सुभेंदू त्रिपाठी, पीएलवी श्रीलाल प्रसाद तथा प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर की जिला परियोजना समन्वयक आरती कुमारी ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इससे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल विवाह की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें और इस कुप्रथा को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।शिविर में अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों, आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस दौरान बाल विवाह रोकथाम, बच्चों के अधिकार, महिला सशक्तिकरण और निःशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही बताया गया कि किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से निःशुल्क मदद प्राप्त की जा सकती है।
मौके पर बीएचएम आदित्य रंजन सिंह, हेल्थ इंस्पेक्टर निलेश कुमार झा, प्रधान लिपिक विकास कुमार मिश्रा, प्रखंड प्रसार प्रशिक्षक अनिल कुमार सिंह सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
















