जितेन्द्र कुमार सिन्हा।पटना।बिहार की राजधानी पटना के लिए यह गर्व का क्षण है। एजी कॉलोनी निवासी समरथ सिन्हा ने जयपुर में आयोजित नेशनल एबैकस चैंपियनशिप 2026 में प्रथम रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।
देशभर के हजारों प्रतिभागियों के बीच अपनी असाधारण गणितीय क्षमता और मानसिक गणना कौशल का प्रदर्शन करते हुए समरथ ने यह उपलब्धि हासिल की। समरथ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि लगन, अनुशासन और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
नेशनल एबैकस चैंपियनशिप 2026 में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 26 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता कई चरणों में आयोजित की गई थी, जिसमें प्रतिभागियों की गणना क्षमता, एकाग्रता और मानसिक दक्षता की कड़ी परीक्षा ली गई। कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच केवल 150 प्रतिभागी ही पांचवें राउंड तक पहुंच सके। इसके बाद निर्णायक छठे राउंड में समरथ सिन्हा ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने महज तीन मिनट के भीतर 100 प्रश्नों का सही उत्तर देकर प्रथम स्थान अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि उनकी अद्भुत मानसिक गणना क्षमता और वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर समरथ सिन्हा को एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने समरथ को देश के सर्वश्रेष्ठ युवा एबैकस प्रतिभागियों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।
जानकारों का मानना है कि एबैकस केवल गणितीय कौशल को ही नहीं बढ़ाता, बल्कि बच्चों की स्मरण शक्ति, एकाग्रता और तार्किक सोच को भी विकसित करता है। समरथ की सफलता इस विधा की उपयोगिता को भी रेखांकित करती है।
समरथ की जीत जितनी प्रेरणादायक है, उतना ही भावुक और प्रशंसनीय उनका व्यवहार भी रहा। पुरस्कार ग्रहण करने से पहले उन्होंने सार्वजनिक मंच पर जाने से पूर्व अपने माता-पिता के चरण स्पर्श किए। उनके संस्कार और उनकी इस विनम्रता की भी लोगों ने खूब सराहना की।
समरथ की सफलता के पीछे उनके दादा शशि भूषण प्रसाद का भी महत्वपूर्ण योगदान है। शशि भूषण प्रसाद अपने समय के जाने-माने गणितज्ञों में गिने जाते थे। उनकी लिखी गणित की पुस्तकें हाई स्कूल और कॉलेज स्तर पर काफी लोकप्रिय रही हैं। महालेखाकार बिहार से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने शिक्षा और गणित से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा। वे आज भी अपने पोते-पोतियों और नाती-नातिनों को गणित एवं बौद्धिक विकास के लिए समय देते हैं।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि समरथ की गणितीय प्रतिभा को निखारने में दादा के अनुभव और मार्गदर्शन की बड़ी भूमिका रही है।
समरथ सिन्हा की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि छोटी उम्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं।
नेशनल एबैकस चैंपियनशिप 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त कर समरथ सिन्हा ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है। तीन मिनट में 100 प्रश्न हल करने का उनका रिकॉर्ड उनकी असाधारण क्षमता का परिचायक है। साथ ही अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और दादा से मिले संस्कार उनकी सफलता को और भी विशेष बना देते हैं।















