नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बनारस में उतरेगा कन्हैया कुमार ?

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Kanhaiya against Modi

प्रमोद दत्त.
पटना.भाकपा नेता कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अटकलों का बाजार गर्म है.कभी बिहार कांग्रेस की बागडोर देने की चर्चा हो रही है तो कभी दिल्ली के मैदान में उतारने की चर्चा तो कभी देश भर में मोदी-विरोध का माहौल बनाने के लिए कन्हैया को लगाने की चर्चा है.जो भी हो इतना तो तय है कि तत्काल यूपी के चुनाव में प्रियंका की टीम में कन्हैया को सक्रिय किया जाएगा.मोदी-योगी पर कन्हैया का प्रहार होगा, यूपी फतह के प्रयास किए जाऐंगें.कन्हैया के तीखे प्रहार का कुछ भी असर दिखाई दिया तो 2024 चुनाव में बनारस से मोदी के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार कन्हैया कुमार बनाए जा सकते हैं.
कल क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि कांग्रेस में कन्हैया की उपयोगिता यूपी चुनाव के बाद ही तय होगी.लेकिन प्रेक्षकों का यह भी मानना है कि जिस प्रकार बिहार में तेजस्वी के तेज को धूमिल होने के खतरे से बचाने के लिए लालू प्रसाद ने कन्हैया कुमार को उभरने का मौका नहीं दिया,बेगूसराय लोकसभा चुनाव में राजद का समर्थन नहीं दिया,वही डर कांग्रेस में हो सकती है.मोदी-विरोध मुहिम में फ्लाप चल रहे राहुल गांधी के सामने कन्हैया कुमार ने अगर बेहतर प्रदर्शन कर लिया तो राहुल गांधी का कद छोटा हो सकता है.इसलिए यह सवाल अभी से उठाए जा रहे हैं कि आजादी मांगने वाले कन्हैया कुमार को कांग्रेस में कितनी मिलेगी आजादी ?
प्रियंका गांधी यूपी चुनाव का शंखनाद बनारस से करने जा रही है.देखना दिलचस्प होगा कि इस अवसर पर कन्हैया कुमार को कितनी तरजीह दी जाती है.भगत सिंह की जयंती के मौके पर कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी के कांग्रेस में शामिल होने के समय कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था- पिछले सात वर्षों से देश में मोदी सरकार की हिटलरशाही नीति के खिलाफ दोनों नेताओं ने आवाज उठाई है.वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा- कन्हैया कुमार फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के प्रतीक हैं.
इधर बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर होनेवाले उपचुनाव में महागठबंधन में दरार पड़ गई है.कांग्रेस की एक सीट की मांग को ठुकराते हुए राजद ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं.माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में पड़ी तेजस्वी-कन्हैया के बीच पड़ी दरार को विधानसभा चुनाव में राजद-भाकपा गठबंधन कर पाटा गया था,वह दरार फिर पड़ने लगा है.लोकसभा चुनाव 2024 में भी यह स्थिति बनी रह सकती है.कम से कम बेगूसराय सीट को लेकर तो निश्चित ही.वैसे भी बेगूसराय सीट पर कांग्रेस का दावा न बनेगा और न ही कन्हैया कुमार के लिए रास्ता साफ होगा.
कन्हैया कुमार भी अपनी राष्ट्रीय छवि बनाना चाहते हैं.अपने मोदी- विरोधी बयानों से जो छवि उन्होंने बनाई है उसे देखते हुए उन्हें मोदी को खिलाफ बनारस के लिए तैयार किया जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.बनारस में कन्हैया कुमार को खड़ा कर कांग्रेस सपा,बसपा,औबैसी,वामदलों आदि तमाम विपक्षी दलों के समर्थन पाने की कोशिश भी करेगी.कन्हैया कुमार को यहां अपनी हार में भी जीत दिखाई देगी.देश विदेश के तमाम मीडिया में कन्हैया कुमार छा जाऐंगें.ऐसी स्थिति में कैप्टन अमरेन्दर सिंह की लोकप्रियता से भयभीत राहुल गांधी के सामने कन्हैया कुमार की लोकप्रियता भी गले की हड्डी बन सकती है.

 

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