गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में K.K.Pathak ?

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KK Pathak

विशेष संवाददाता.पटना.जब से के.के.पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पद पर आए हैं तब से शिक्षा विभाग में विभागीय पत्रों- आदेशों की वर्षा हो रही है.चौबीस घंटे यानि 24X7 अधिकारियों,कर्मियों और हेडमास्टर को अलर्ट मोड में रहना पड़ता है- पता नहीं कब नया आदेश आ जाए ? पत्र लिखने की तीव्र रफ्तार को देखते हुए कहा जाने लगा है कि केके पाठक का नाम शीघ्र ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया जा सकता है.
  सभी राज्यकर्मियों से संबंधित कार्मिक,प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा 1979 से 2000 तक यानि 21 वर्षों का संकल्प,परिपत्र,आदेश आदि से संबंधित संकलन प्रकाशित किया गया था जो 250 पृष्ठों में सिमट गया.इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा से संबंधित 1974 से 1987 अर्थात 13 वर्षों के विभागीय पत्र,परिपत्र,अधिसूचना,नियमावली आदि का संग्रह 220 पृष्ठों में और प्राथमिक एवं मध्य शिक्षा के 1982 से 1997 अर्थात 15 वर्षों के विभागीय पत्र, परिपत्र,अधिसूचना,नियमावली का संग्रह 64 पृष्ठों का प्रकाशित हुआ जिसे विधान मंडल के सदन पटल पर रखा गया था. अब शिक्षा विभाग में पिछले 11 महीने में जारी पत्र,परिपत्र,अधिसूचना,नियमावली आदि का संकलन प्रकाशित किए जाएं तो अनुमान लगाया जा सकता है कि वह कितने खंडों और कितने पृष्ठों का होगा.
    सभी विभागीय पत्र व आदेश व्हाटसअप पर सॉफ्ट कॉपी में भेजे जा रहे हैं जो पहले हार्ड कॉपी में स्कूलों में रिसिव करके पहुंचाया जाता था.माना कि सरकारी कार्यालय को पेपरलेस बनाया जा रहा है तो हेडमास्टरों से हार्ड कॉपी में पहुचाने का दबाव क्यों ?हाई स्कूलों में और कुछेक मिडिल स्कूलों में ही कम्प्यूटर-प्रिंटर की व्यवस्था है.सभी स्कूलों में ये सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना सभी स्कूलों को हाईटेक मान लिया गया है.
बिहार के स्कूलों में 50 प्रतिशत से अधिक महिला शिक्षक हैं.सुबह 8 बजे स्कूल के लिए निकलना,शाम 6 बजे तक घर लौटना.घर-गृहस्थी काम करते हुए अगर 9 से 9.30 तक नहीं सोएंगी तो सुबह 8 बजे स्कूल के लिए निकलना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.अक्सर देर रात 10 से 11 के बीच भी आदेश व्हाट्सअप पर भेजे जाते हैं और कभी-कभी उस आदेश का पालन 24 घंटे के अंदर करना होता है.टीचर सुबह में जल्दीबाजी आदेश नहीं देख पाई तो स्कूल में चेतना सत्र के बाद उस आदेश पर ध्यान जाता है. आदेश पर आदेश के कारण अनेक हेडमास्टर का मोबाईल हैंग करने लगा है.
शिक्षकों की एक परेशानी यह भी है कि पता नहीं कब कौन सी छुट्टी रद्द कर दी जाएगी.अगर पूर्व घोषित छुट्टी के आधार पर टीचर पारिवारिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम बना लें तो मुसीबत में पड़ सकते हैं.वेतन कटौती को तो शिक्षा विभाग ने ऐसा हथियार बना लिया है जिससे मानवाधिकार की हत्या की जा रही है. सरकारी नियमानुसार निलंबन का अवधि में भी सरकारी कर्मी को परिवार के भरण-पोषण के लिए आधा वेतन दिया जाता है.लेकिन केके पाठक जैसे शंकर की त्रिशुल पर बैठे नियम-कानून को ताक पर रखकर विभाग चला रहे हैं. मुख्यमंत्री की सदन में की गई घोषणा का भी उनपर कोई असर नहीं है.हालांकि सत्तापक्ष के कई विधायकों ने इस आचरण को सदन के विशेषाधिकार का हनन बताते हुए चेतावनी जरूर दे रहे हैं.लेकिन इससे बेपरवाह केके पाठक आदेश पर आदेश देते जा रहे हैं मानों उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराना हो.