“हिंदी लघु कथा:संरचना और मूल्यांकन” विषयक संगोष्ठी

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संवाददाता.पटना.प्रसिद्ध कथाकार- उपन्यासकार डॉ संतोष दीक्षित का मानना है कि लघुकथा एक ऐसी विधा है जो अत्यधिक संतुलन और सजगता की मांग करती है। एक अच्छी लघुकथा लिखना आसान कार्य नहीं है। सबसे बड़ी समस्या विषय के चयन की होती है, जिसे हम बहुत कम शब्दों में वह भी गहराई के साथ अभिव्यक्त कर सके।यह एक भाषाई कवायद है, संवेदनाओं की घनीभूतता है, विषय के चयन और प्रस्तुतीकरण की सर्वश्रेष्ठ बानगी है ।

वे रविवार को पटना सिटी स्थित ऐतिहासिक हितैषी पुस्तकालय सभागार में अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच और स्वरांजलि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वार्षिक पत्रिका “संरचना” के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे । इससे पूर्व संरचना के ग्यारहवें अंक का लोकार्पण दूरदर्शन पटना के कार्यक्रम प्रमुख डॉ राजकुमार नाहर, कथाकार डॉ संतोष दीक्षित, लघुकथा मंच के अध्यक्ष डॉ सतीश राज पुष्करणा, डॉ अनीता राकेश एवं डॉक्टर थ्रुव कुमार ने समवेत रूप से किया।

राज कुमार नाहर ने संरचना के संपादक  डॉ कमल चोपड़ा की सराहना करते हुए इस अंक में स्थान पाने वाले बिहार के सभी लघुकथाकारों और आलोचकों को बधाई दीऔर कहा कि सिरसा, इंदौर और दिल्ली के साथ पटना भी 1980 के दशक से लघुकथा आंदोलन का एक प्रमुख केन्द्र रहा है।

डॉ ध्रुव कुमार ने कहा कि लघुकथा अपनी शिल्प, शैली, बुनावट और घनीभूत कसाव के कारण नई पीढ़ी में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यही कारण है कि लघुकथा सृजन में युवा पीढ़ी की रचनात्मक भागीदारी बढ़ रही है । उन्होंने इसे साहित्य की सबसे सशक्त विधा के लिए सुखद संकेत बताया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ सतीशराज पुष्करणा ने कहा कि “संरचना” लघुकथा केंद्रित वार्षिक पत्रिका है जो सर्जनात्मक और आलोचनात्मक दोनों पक्षों पर पिछले 12 वर्षों से लघुकथाकारों व साहित्य के पाठकों के लिए एक मार्गदर्शिका का कार्य कर रही है ।

इस अवसर पर डॉ अनीता राकेश ने कहा कि लघुकथा के क्षेत्र में संरचना एक ऐसी पत्रिका है जो देश भर के लघुकथाकारों की चुनिंदा रचनाएं साल में एक बार प्रकाशित करती है । इनमें बिहार से जुड़े काफी रचनाकार प्रकाशित हुए हैं।

गोष्ठी में  वीरेंद्र भारद्वाज, विभा रानी श्रीवास्तव , संगीता गोविल, रानी कुमारी, प्रभात धवन , रीता सिंह और भोला पासवान  ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर महेंद्र अरोड़ा, पप्पू गुप्ता, अभिलाष दत्त , जितेंद्र मोहन, देवी उपाध्याय , जितेन्द्र मोहन, प्रभात वर्मा, संजय कुमार और राजा पुट्टू भी उपस्थित थे।  संचालन स्वरांजलि के संयोजक अनिल रश्मि एवं धन्यवाद ज्ञापन आलोक चोपड़ा ने किया‌ ।

गौरतलब है कि संरचना के 11वें अंक में बिहार से जुड़े एक दर्जन लघुकथाकारों की रचनाएं प्रकाशित हुई है। इसके अतिरिक्त कुल 9 आलेखों में से 5 आलेख बिहार के समीक्षकों की है। इनमें “हिंदी लघुकथा : संरचना और मूल्यांकन” शीर्षक से सतीश राज पुष्करणा, भगवती प्रसाद द्विवेदी (लघुकथा:  परंपरा एवं प्रासंगिकता) डा ध्रुव कुमार की “अलिखित को सार्थक शब्द देती लघुकथाएं” वीरेंद्र भारद्वाज की “हिंदी की संवेदनशील लघुकथाएं”  और सिद्धेश्वर कश्यप की ” हिंदी लघुकथाओं के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य ” शीर्षक से प्रकाशित आलेख शामिल हैं । कार्यक्रम के अंत में लघुकथाकारों ने लघु कथाओं का पाठ किया और सभी अतिथियों को स्वरांजलि की ओर से पौधे भेंट स्वरूप प्रदान किए गए।

 

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