लॉकडाउन-4 में दुकानें खुलने से दुकानदारों के चेहरे पर लौटी रौनक

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संवाददाता.खगौल. केंद्र और राज्य सरकार के आदेश से कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए जारी लॉक डाउन-4 में कपड़ा ,रेडीमेड ,किताब-कौंपी व स्टेशनरी आदि की दुकानों को खोलने की अनुमति मिलने से सोमवार से बाजार में रौनक देखने को मिल रहा है |

इसके लिए स्थानीय दुकानदार व वार्ड पार्षद भरत पोद्दार सहित सुजय गुप्ता,उमा गुप्ता,सतीश गुप्ता ,श्रवण पोद्दार,मो.मिन्हाज ,मो.इफरान, मो.जफर,गौतम गुप्ता,मो.सज्जाद आदि ने इस के लिए पटना के डीएम कुमार रवि, दानापुर के अनुमंडलाधिकारी तरनजोत सिंह और स्थानीय खगौल के थाना प्रभारी मुकेश कुमार मुकेश के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है |

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कोरोना संक्रमण जैसे महामारी संकट के बीच पिछले करीब दो महिना से दुकानों के बंद होने से दुकान मालिकों के साथ-साथ खास कर इस में काम करने वाले गरीब कर्मचारियों की आर्थिक स्थित काफी बदतर होने लगी थी | कई परिवारों के सामने तो परिवार के भरण-पोषण की संकट छाने लगा | दुकानों के खुलने से एक आशा की किरण जगी है कि समय के साथ फिर से आर्थिक स्थित धीरे-धीरे पटरी पर जरुर लौटेगी | दुकानदारों को इस बात की भी चिंता है कि इस वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण हम सबों की लापरवाही से बढे नहीं,इस बात का ध्यान हर हाल में हमारे साथ ग्राहकों को रखना चाहिए और प्रशासन के गाईडलाईन का हर हाल में पालन होना चाहिए |

लंबे समय के बाद दुकान खोलने  वाले दुकानदारों  के चेहरे पर खुशी दिखी तो ग्राहकों  के चेहरे पर भी सुकून दिखा। दुकानें खुलने से सड़कों पर थोड़ी चहल-पहल भी दिखी।बंद दुकानें खोलने पहुंचे व्यापारियों के चेहरे पर एक संतोष का भाव नजर आया। पहले दिन अधिकांश दुकानदार अपने-अपने प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई करते नजर आए। कहीं-कहीं शटर आधे खुले हुए तो कहीं पूरे खुले हुए दिखे। सड़कों का नजारा भी आम दिनों की अपेक्षा बदला-बदला रहा। पहले दिन दुकानों पर भीड़ नहीं रही लेकिन माहौल में बदलाव महसूस किया जा रहा था। जहां-तहां दिख रहे लोग एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाकर खड़े थे। कई लोगों के चेहरे पर मास्क  और हाथ में दस्ताने पहने नजर आये | दुकानों के सामने ग्राहकों के उपयोग के लिए साबुन व सेनेटाईजर भी हुआ रखा दिखा |

इस दौरान दुकानदारों की ओर से सोशल  डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन कराया गया। सभी दुकानों के बाहर सफेद घेरा बनाया गया है। उसमें खड़ा रहने वालों को ही सामग्री दी जा रही थी ।

 

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