बिहार: धर्मांतरण और मानव तस्करी पर VHP की चिंता 

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संवाददाता। पटना।बिहार के मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर ईसाई पादरी फ्रांसिस किशपोटा के चंगुल से बिहार एवं झारखंड के 5 से 14 वर्षीय 21 बच्चों को कथित धर्मांतरण एवं मानव तस्करी के उद्देश्य से ले जाते हुए पकड़ा गया और उन्हें मुक्त कराया गया। विहिप ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह घटना देश की आंखें खोल देने वाली है।

विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय कार्यकर्ताओं की सतर्कता से मामला पुलिस के संज्ञान में आया तथा बच्चों को ले जाने वाले उक्त पादरी को गिरफ्तार किया गया। किंतु प्रश्न यह उठता है कि पिछले कुछ वर्षों से जनजातीय समाज के बच्चों, महिलाओं एवं भोले-भाले लोगों के अवैध धर्मांतरण और मानव तस्करी की घटनाएं लगातार सामने क्यों आ रही हैं। कभी पूर्णिया, कभी गया अथवा राजधानी पटना में इस प्रकार की घटनाएं समाज को चिंतित करने वाली हैं।

विहिप का मानना है कि इन घटनाओं का एक प्रमुख कारण यह भी है कि बिहार में धर्मांतरण विरोधी कोई विशेष कानून नहीं है तथा झारखंड में लागू कानून का कठोरता से पालन नहीं हो रहा है। साथ ही, वर्तमान कानून को और अधिक प्रभावी एवं कठोर बनाए जाने की आवश्यकता है।

विहिप ने मांग की है कि आवश्यकता इस बात की भी है कि इन सभी मामलों को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराई जाए, ताकि धर्मांतरण एवं मानव तस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों तथा मानवाधिकार विरोधी षड्यंत्रों का पर्दाफाश हो सके। जहां ऐसे कानून नहीं हैं, वहां शीघ्र कानून बनाया जाए तथा उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

इस घटना पर विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार ने राज्य सरकार से धर्मांतरण एवं मानव तस्करी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने हेतु सख्त कानून बनाने तथा उसके कठोर क्रियान्वयन की मांग को पुनः दोहराया।

उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर एवं भोले-भाले वर्गों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे ऐसे षड्यंत्र किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

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