वैश्विक पहचान बनाने वाले भागलपुर के संजीव कुमार को ट्रूली इंडियन अवार्ड 

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अक्टूबर में इटली के मिलान शहर में होंगे सम्मानित 

संवाददाता।भागलपुर।समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगाने वाले प्रो. संजीव कुमार को “इंडो यूरोपियन एक्सिलेंस फोरम” की ओर से प्रतिष्ठित “ट्रूली इंडियन पुरस्कार” से सम्मानित किया जाएगा।

यह सम्मान उन्हें ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण तथा बकरी आधारित आजीविका मॉडल के माध्यम से किए गए उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।

यह पुरस्कार इस वर्ष अक्टूबर में इटली के मिलान शहर में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाएगा। फोरम अगले एक महीने में भारत और यूरोप से विभिन्न श्रेणियों में कुल चार विशिष्ट व्यक्तियों का चयन करेगा, जिनमें प्रो. संजीव कुमार का चयन उनके प्रेरणादायक कार्यों के आधार पर किया गया है।

इस सम्मान की घोषणा फोरम के पूर्व अध्यक्ष एमिलियानो चीएज़्ज़ी और वर्तमान अध्यक्ष प्रो. आशीष यादव द्वारा की गई। इस अवसर पर प्रो. आशीष यादव ने अपने संदेश में कहा कि प्रो. संजीव कुमार का बकरी आधारित आजीविका कार्यक्रम और ग्रामीण समाज के उत्थान के लिए उनका समर्पण सशक्तिकरण, स्थायित्व और सकारात्मक परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने उन्हें इस सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना की।

बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड के सोनावर्षा जैसे दियारा क्षेत्र से निकलकर वैश्विक पहचान बनाने वाले प्रो. संजीव कुमार आज लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। हर वर्ष बाढ़ और अभाव से जूझने वाले इस क्षेत्र की परिस्थितियों ने उनके भीतर समाज के लिए कुछ करने का दृढ़ संकल्प पैदा किया।

वर्ष 2008 में उन्होंने “द गोट ट्रस्ट” की स्थापना कर बकरी पालन को एक प्रभावी और टिकाऊ आजीविका मॉडल के रूप मेंसित किया। उनके प्रयासों से आज देश के अनेक राज्यों में लाखों परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक मजबूत आधार मिला है।

उनकी पहल के अंतर्गत हजारों “पशु सखियाँ” गांव-गांव जाकर बकरीपालकों को प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं, जिससे यह क्षेत्र एक संगठित व्यवसाय के रूप में विकसित हो रहा है।

प्रो. संजीव कुमार की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष, संवेदना और संकल्प की कहानी है जो समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की शक्ति रखती है। आज जब उन्हें “भारत के गोट मैन” के रूप में जाना जाता है, तो यह सम्मान उनके साथ-साथ उन लाखों परिवारों का भी है जिनके जीवन में उन्होंने नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है।

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