गंगा स्नान से होगी सोनपुर मेले की शुरुआत

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Sonepur fair

अजीत.पटना.सोनपुर मेला यह राजधानी पटना से 25 किलोमीटर और वैशाली के हाजीपुर शहर से 3 किलोमीटर दूर है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगने वाला यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है। यह मेला भले ही पशु मेला के नाम से विख्यात है, लेकिन इस मेले की खासियत यह है कि यहां सूई से लेकर हाथी{अब प्रतिबंध} तक की खरीदारी आप कर सकते थे।
सोनपुर मेला देश दुनिया में थिएटर वाला डांस सीखने के लिए विख्यात रहा है। वह इस मेला में दुनिया का सबसे बड़ा भूतों का मेला भी लगता है।इससे भी बड़ी बात यह कि मॉल कल्चर के इस दौर में बदलते वक्त के साथ इस मेले के स्वरूप और रंग-ढंग में बदलाव जरूर आया है लेकिन इसकी सार्थकता आज भी बनी हुई है।
     पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के दो भक्त जय और विजय शापित होकर हाथी (गज) और मगरमच्छ (ग्राह) के रूप में धरती पर उत्पन्न हुए थे। एक दिन कोनहारा के तट पर जब गज पानी पीने आया था तो ग्राह ने उसे पकड़ लिया था। फिर गज ग्राह से छुटकारा पाने के लिए कई सालों तक लड़ता रहा। तब गज ने बड़े ही मार्मिक भाव से अपने हरि यानी विष्णु को याद किया।
तब कार्तिक पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान ने उपस्थित होकर सुदर्शन चक्र चलाकर उसे ग्राह से मुक्त किया और गज की जान बचाई। इस मौके पर सारे देवताओं ने यहां उपस्थित होकर जयजयकार की थी। लेकिन आज तक यह साफ नहीं हो पाया कि गज और ग्राह में कौन विजयी हुआ और कौन हारा।
इस स्थान के बारे में कई धर्मशास्त्रों में चर्चा की गई है। हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से सौ गोदान का फल प्राप्त होता है। कहा तो यह भी जाता है कि कभी भगवान राम भी यहां पधारे थे और बाबा हरिहरनाथ की पूजा-अर्चना की थी।5-6 किलोमीटर के वृहद क्षेत्रफल में फैला यह मेला हरिहरक्षेत्र मेला और छत्तर मेला मेला के नाम से भी जाना जाता है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ यह मेला शुरू हो जाता है और एक महीने तक चलता है। यहां मेले से जुड़े तमाम आयोजन होते हैं।
इस मेले में कभी अफगान, इरान, इराक जैसे देशों के लोग पशुओं की खरीदारी करने आया करते थे। कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने भी इसी मेले से बैल, घोड़े, हाथी और हथियारों की खरीदारी की थी। 1857 की लड़ाई के लिए बाबू वीर कुंवर सिंह ने भी यहीं से अरबी घोड़े, हाथी और हथियारों का संग्रह किया था। अब भी यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है। देश-विदेश के लोग अब भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाते हैं और यहां खिंचे चले आते हैं।
   इसी तरह सिख ग्रंथों में यह जिक्र है कि गुरु नानक यहां आए थे। बौद्ध धर्म के अनुसार अंतिम समय में भगवान बुद्ध इसी रास्ते कुशीनगर गए थे। जहां उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। ऐसे और भी न जाने कितने इतिहास यह अपने आप में समेटे हुए है।
क्या खास है यहां-
सोनपुर की इस धरती पर हरिहरनाथ मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां हरि (विष्णु) और हर (शिव) की एकीकृत मूर्ति है। इसके मंदिर के बारे में कहा जाता है कि कभी ब्रह्मा ने इसकी स्थापना की थी। इसके साथ ही संगम किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली की मूर्ति में शुंग काल का स्तंभ है। कुछ मूर्तियां तो गुप्त और पाल काल की भी हैं।
छपरा जिले के सोनपुर में लगने वाले एशिया के सबसे बड़े पशु मेले हरिहर क्षेत्र में प्रतिवर्ष देश विदेश से लाखों श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान हरिहरनाथ को जल अर्पण करने के लिए सोनपुर आते हैं। शैव और वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ।आपको जानकर आश्चर्य होगा की जिस दिन इस मेले का शुभारंभ यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है यहां भूतों उतारने का भी देश का सबसे बड़ा मेला लगता है हजारों श्रद्धालु जिन्हें इस बात का वहम होता है  कि वे प्रेत बाधा से पीड़ित हैं अपनी मनौती को लेकर सोनपुर के गंडक-गंगा संगम स्थल पर भूत उतरवाने आते है. जानकार बताते हैं कि यह परंपरा लगभग डेढ़ सौ वर्षों से चली आ रही है. इंसान भले ही चांद पर पहुंच गया हो ज्ञान विज्ञान व तकनीक मानव जीवन का अभिन्न अंग बन गई हो पर अंधविश्वास से घिरे लोगों के लिए प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा सोनपुर भूतों के मेले से कम नहीं होता.
सोनपुर के कोनहारा घाट पर अंधविश्वास की सदियों से चली आ रही प्रथा  है। परंपरा का पालन ओझा और भगतों करते है और यहां खूब भूतखेली होती है। मांदर की थाप पर ग्रामीण इलाकों से आये भगत हाथ मे छड़ी लिए महिलाओं के शरीर पर प्रहार कर उनके ऊपर से कथित रूप से भूत उतारते दिखते है।स्थापित अंधविश्वासों, भूत और बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के लिए ओझा और भूतों को मानने वाले और भूतों से परेशान लोग इस खास दिन का इंतजार करते हैं और यहां आकर अनुष्ठान करते हैं और उनके ऊपर से ओझा-भगत भूतों को भगाते हैं। प्रशासनिक  स्तर से इस कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में कोई कारगर पहल नहीं किया गया है.

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