खगौल वेधशाला पर शोध जारी

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सुधीर मधुकर

                  बीते दिनों अमेरीका यात्रा पर गए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ,गूगल हेड ऑफिस में गूगल के मैप द्वारा वाराणसी के साथ साथ महान वैज्ञानिक खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का गाँव खगौल ( खगोल ) को भी दिखाया गया .जिस कारण खगौल ( खगोल ) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर  से चर्चा का विषय बना हुआ है .बिहार की राजधानी पटना से सटे 10 किलोमीटर पश्चिम स्थित आर्यभट्ट की कर्मभूमि खगौल ( खगोल ) स्थित है .जो पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत दानापुर रेल मंडल का मुख्यालय भी है .आर्यभट्ट के जन्म स्थान की जानकारी , उन्हीं के लिखे ग्रन्थ ‘आर्यभट्टीयम’ से मिलती है .जिस में उन्होंने लिखा है कि कलियुग के 3600 वर्ष बीत चुके हैं .इस आधार माना जाता है कि आर्यभट्ट का जन्म 476 ई. में हुआ है .जानकारों का मानना है कि आर्यभट्ट की पढाई पटना के कुसुमपुर में हुई थी . पटना के नजदीक खगौल और तरेगना टीला पर आर्यभट्ट की वेधशाला हैं .इस विषय पर स्थानीय नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रमणि शर्मा बताते हैं कि वर्ष 1909 में हुए सर्वे मैप में थाना संख्या 51 आदि में और कई प्लॉट है .करीब 20 कठ्ठा जमीन रजिस्टर २ में दर्ज है ,जो गैरमजरुआ है,यह जमीन माना जाता है कि आर्यभट्ट की है ..इस जगह एक कुआँ भी है , इसकी ईंटें काफी पतली हैं .जो पौराणिक काल का परिचायक है .फिलहाल यह कुआँ जमीन में विलीन होकर पानी में डूबा हुआ है .

इस जमीन को स्थानीय दबंगों ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर गाय-भैंस का खटाल , दुकान और घर भी बना लिया है . इस कारण वेधशाला का नामो निशान मिटता जा रहा है .जानकारों का दावा है कि इसी जमीन पर महान गणितज्ञ वैज्ञानिक आर्यभट्ट बैठ कर रात्रि में तारों की गिनती किया करते थे .सरकार के निर्देश पर पटना के जिलाधिकारी , दानापुर के सीओ ,कृष्ण विज्ञान केंद्र, पटना के निदेशक आदि ने भी यहां का कई बार दौरा कर इसका जायजा ले चुके हैं .अगर इस जमीन की खुदाई की जाय तो हकीकत सामने आ सकती है.

वहीं दूसरी ओर पाटलिपुत्र के इतिहास के पन्नों में दर्ज महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की वेधशाला का रहस्य खोलने के लिए पुरातात्विक विशेषज्ञों ने और इतिहासविदों ने खोज शुरू की है. शोध और अनुसंधान की प्रतिष्ठित संस्था काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान ,पटना के निदेशक डॉ.विजय कुमार चौधरी के मुताबिक आर्यभट की प्रसिद्द स्थल बिहटा,खगौल और मसौढ़ी वेधशाला को लेकर पुरातात्विक अन्वेषण शुरू किया है .डॉ.चौधरी के अनुसार इन स्थलों के नाम के कारण उनके खगोलीय महत्व के अनुरूप वहाँ तीन प्रमुख वेधशाला मिलने की संभावनाएं हैं. उल्लेखनीय है कि जुलाई 2009 में जब पूर्ण सूर्यग्रहण लगा तो इसे देखने के लिए विश्वभर के खगोलविद ,वैज्ञानिक और खगोलीय घटना के जानकार जुटे थे .जिस में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे .इस मौके पर नीतीश ने कहा भी था कि मसौढ़ी ,खगौल और बिहटा के पास स्थित तरेगनाओं में त्रिकोणीय सम्बन्ध है .इसे सौर सर्किट के रूप में विकसित कर राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दिया जायेगा .बिहार में खगोलीय घटनाओं के कई प्रमुख स्थान हैं , जिसमें मसौढ़ी का तरेगना ,औरंगाबाद का सूर्यमंदिर बहुत प्रसिद्द है .मसौढ़ी ,खगौल और बिहटा के पास स्थित तरेगनाओं में त्रिकोणीय सम्बन्ध है .यह तीनों स्थल 25-25 किलोमीटर की सामान दूरी पर स्थति है .अगर इस के तीनों बिन्दुओं को आपस में मिला कर देखा जाय तो एक त्रिभुज बनता है .बिहटा के पास तरेगना का टीला अब सोन नदी में विलीन हो गया है .लेकिन  फिलहाल अभी जो भी चीजें है उसी को आधार माना जा रहा है .कोलकाता के टकसाल पदाधिकारी डॉ.रेहान अहमद के मुताविक 1926 में यहाँ खुदाई हुई तो छठी ईसा पूर्व के सील लगे हुए सिक्के बरामद किये गये |

आर्यभट पांचवी शताब्दी ईसा पूर्व जन्मे थे .बिहटा और खगौल के आसपास खुदाई में छठी शताब्दी के बर्तन , मृदभाड आदि उत्खनन में मिला है .श्री चौधरी के मुताविक पुरातात्विक अन्वेषण कार्यक्रम में परिकल्पना खगोल,तरेगना,मसौढ़ी आदि नामों के आधार पर बनाई गया है .खगोल का अर्थ ब्रह्मांड और तरेगना का अर्थ तारों की गिनती से होती है .सारे अध्ययन होने के बाद ही उत्खनन की प्रकिया आगे बढ़ेगी .शुरूआत में खगोल वैज्ञानिक अमिताभ पाण्डेय और अमिताभ घोष इस परियोजना में साथ दे रहे हैं .इस को लेकर उस समय विहार विधान सभा में सदस्यों ने इसे सौर सर्किट विकसित करने की मांग की थी .सौर सर्किट के विकास को लेकर तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू ने बताया था कि ,इस बारे में जानकारी जुटाने और विस्तृत योजना रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को दिया गया है. जबकि विभाग के निदेशक अतुल कुमार ने कहा कि यह मामला पर्यटन विभाग का है इसलिए इसकी फाइलें पर्यटन विभाग को दे दी गई हैं. लेकिन अबतक इस विषय पर कोई कार्य होता नहीं दिख रहा है. बस विभागीय फाइलों में सिमट कर रह गया है.

सरकार को चाहिए कि बिहार की इन अस्मिताओं का ख्याल समुचित ढ़ंग से रखे और भू-माफियाओं पर भी कड़ी कार्रवाई करे ताकि कोई भी इस पौराणिक संपत्तियों को कबजाने की नहीं सोचे.

 

 

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