उच्च शिक्षा में सुधार हेतु बिहार लोक भवन में बैठक 

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उच्च शिक्षा

संवाददाता।पटना।बिहार लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार एवं प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए की जा रही नई पहलों की समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई तथा महत्वपूर्ण निदेश दिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर भी उपस्थित थे।

बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता, डिजिटल प्रशासन तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने हेतु संचालित विभिन्न सुधारात्मक पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई। बताया गया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। इस संबंध में राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसम्बर, 2026 तक समर्थ पोर्टल के लेखा एवं वित्त, कर्मचारी सेवाएँ एवं अकादमिक पैकेज के सभी 26 मॉड्यूल्स पूर्णतः लागू करने का निर्देश दिया। यह भी अवगत कराया गया कि समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन से प्रशासनिक व्यय में करोड़ों रुपये की बचत सुनिश्चित हुई है तथा पारदर्शी, डिजिटल एवं एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था के कारण निर्णय प्रक्रिया अधिक उत्तरदायी एवं प्रभावी बनी है।

बैठक में बताया गया कि नवसृजित 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के लिए संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की केन्द्रीयकृत नियुक्ति प्रक्रिया अपनायी जा रही है। इन पदों के लिए बेहतर वेतनमान का प्रावधान किया गया है तथा ऐसी चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है जिससे योग्य, सक्षम एवं समर्पित शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो सके और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आए।

बैठक में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए तैयार दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान प्रतिवर्ष कम-से-कम एक कार्यक्रम का आयोजन अनिवार्य रूप से करेगा, जिससे प्राध्यापकों की अध्ययन-अध्यापन क्षमता का सतत विकास सुनिश्चित हो सके। इसके लिए पटना एवं मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय में स्थित मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्रों को और अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनाया जा रहा है।

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बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है तथा स्नातकोत्तर के 43 विषयों के पाठ्यक्रम का अनुमोदन जुलाई के प्रथम सप्ताह तक दी जायेगी।

शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना तथा मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। बताया गया कि सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क, अपार एवं राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी सहित अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी की जा रही है।

उच्च शिक्षा के नियामकीय ढाँचे को सरल, पारदर्शी एवं समसामयिक बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस क्रम में 15 राज्यों के अधिनियमों का अध्ययन कर उनकी उत्कृष्ट एवं उपयुक्त व्यवस्थाओं को समाहित करते हुए तैयार किए गए एक व्यापक प्रस्ताव पर अग्रेतर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। यह सहमति बनी की बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए एक नया अधिनियम बनाया जाए जो दूसरे राज्यों तथा केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ प्रणालियों पर आधारित हो।

बैठक में विद्यार्थियों की लंबित डिग्रियों के शीघ्र एवं समयबद्ध वितरण हेतु मिशन मोड में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इस कार्य को 30 सितम्बर तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनुशासन एवं नियमितता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा शिक्षकों की पदोन्नति हेतु समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी जानकारी भी दी गई। सामान्य स्थानान्तरण केवल जून माह में होंगे तथा इससे इतर स्थानान्तरण केवल अति आवश्यक होने पर ही कुलाधिपति के पूर्वानुमोदन से हो सकेगा।

संस्थागत उत्कृष्टता एवं निरंतर सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समर्थ पोर्टल के माध्यम से शिकायत एवं बजट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, उत्कृष्ट संस्थानों एवं व्यक्तियों के लिए कुलाधिपति ट्रॉफियों की शुरुआत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमित कार्यशालाओं के आयोजन तथा संस्थागत प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए व्यापक आकलन प्रणाली विकसित करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक समर्पित एवं समृद्ध कुलाधिपति पुस्तकालय की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले शोध संसाधनों एवं संस्थानों तक सहज पहुँच उपलब्ध हो सकेगी।

राज्यपाल ने कहा कि इन सभी पहलों के समन्वित एवं प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, डिजिटलीकरण, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा छात्र-केंद्रित प्रशासन को नई मजबूती मिलेगी। बैठक में उच्च शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार के लिए आवश्यक संरचनात्मक एवं नीतिगत परिवर्तनों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए माननीय राज्यपाल द्वारा की जा रही पहलों की सराहना करते हुए उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए जिससे सामान्य उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बिहार के विद्यार्थियों को राज्य से बाहर न जाना पड़े। माननीय उच्च शिक्षा मंत्री ने भी बैठक के दौरान अनेक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी सुझाव दिए।

बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार एवं सचिव लोकेश कुमार सिंह, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो० एन०के० अग्रवाल, राज्यपाल सचिवालय के पदाधिकारीगण एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

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