समाचार सार:कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने का मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश।2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सुनिश्चित सिंचाई सुविधा।
6,282.32 करोड़ रूपये की परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य।
संवाददाता।पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत चैनपुर ग्राम में निर्माणाधीन कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना स्थल का निरीक्षण किया।
बुधवार को निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति तथा कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।
स्थल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री चैनपुर ग्राम स्थित परियोजना के कैम्प कार्यालय पहुंचकर वहां परियोजना की समीक्षा की। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह ने परियोजना की कार्य प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्यों की स्थिति एवं विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना सीमांचल और बिहार के लिए एक ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, किसानों की कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और उनकी समृद्धि को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण होने पर 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त एवं सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के माध्यम से बाढ़ के दौरान कोसी नदी के अधिशेष जल को लिंक नहर के जरिए मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे महानंदा बेसिन में जल की उपलब्धता बढ़ेगी और कोसी के बाढ़ प्रभाव को कम करने तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। परियोजना से अररिया में 69,642
हेक्टेयर, पूर्णिया में 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज में 39,548 हेक्टेयर तथा कटिहार में 35,653 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना के अंतर्गत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल संवहन क्षमता 15,000 क्यूसेक्स से बढ़ाकर 20,000 क्यूसेक्स की जाएगी। मुख्य नहर के विस्तार के साथ 4 शाखा नहरों, 6 वितरणियों तथा आवश्यक नहर प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अंतिम छोर पर लगभग 950 क्यूसेक्स जल मेची नदी में प्रवाहित होगा। परियोजना की अनुमानित कुल लागत 6,282.32 करोड़ रूपये है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान किसानों को कृषि कार्य में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्माण कार्य में गति, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने तथा परियोजना से जुड़े सभी कार्यों की लगातार निगरानी करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कोसी और गंडक नदियों को व्यवस्थित एवं सुव्यवस्थित करने के लिए समग्र योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें डैम एवं अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से छोटी नदियों में भी वर्ष भर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहे। उन्होंने जल संसाधनों के समुचित उपयोग, संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना पर कार्य करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी के अधिशेष जल का समुचित उपयोग कर सीमांचल के खेतों तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि, किसानों की आय में बढ़ोतरी तथा क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करें। कोसी-मेची अंतःराज्यीय रिवर लिंक परियोजना बिहार में सिंचाई विस्तार, बाढ़ प्रबंधन और सतत जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका व्यापक लाभसीमांचल के किसानों और आम लोगों को मिलेगा।
स्थल निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, विधायक देवंती यादव, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शस्थ आर०एस० सहित अन्य अधिकारीगण एवं अभियंतागण उपस्थित थे।
















