जानिए… बाहुबलियों को टिकट देना कितना हुआ मुश्किल ?

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अभिजीत पाण्डेय.

पटना.बिहार में विधानसभा चुनाव का शंखनाद होने वाला है. इससे पहले एक बार फिर चुनाव आयोग की सख्ती के बाद बाहुबलियों को टिकट न देने की मांग जोर पकड़ने लगी है. मौजूदा विधानसभा के 57 प्रतिशत विधायक के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. जिससे अब राजनीतिक दलों के लिए बाहुबलियों को टिकट देने की राह आसान नहीं होगी.

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने 150 राजनीतिक दलों को चिट्ठी भेजकर हलचल पैदा कर दी है. अब राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि दागियों को उन्होंने क्यों चुना? साथ ही इसकी सूचना लोकल और लीडिंग अखबार में प्रकाशित करानी होगी.

आयोग की पहल के बाद एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण को लेकर बहस शुरू हो गई है. एक समय था जब राजनेता अपराधियों के मदद से चुनाव जीतते थे, लेकिन बाद में अपराधी खुद ही राजनीति के मैदान के माहिर खिलाड़ी हो गए और बाहुबल और धनबल की बदौलत सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने लगे. उनमें से कई मंत्री बनने में भी कामयाब हो गए.

एडीआर के मुताबिक बिहार के 57 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले विचाराधीन हैं. कुल 138 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं. जिनमें 95 विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. कुल मिलाकर 39 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले विचाराधीन हैं. जिसमें 3 विधायकों के खिलाफ महिला उत्पीड़न के मामले भी दर्ज हैं. 49 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है.

ज्यादातर राजनीतिक दल यह दंभ भरते हैं कि उन्होंने अपराधियों को टिकट नहीं दिया है, लेकिन हकीकत उनके दावों से अलग है. आरजेडी में सबसे ज्यादा कुल 80 विधायकों में से 46 के खिलाफ, जेडीयू के 71 में से 37 विधायकों के खिलाफ, बीजेपी के 53 में से 34 विधायकों के खिलाफ और कांग्रेस के 27 में से 16 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक 2015 चुनाव के बाद 142 विधायक ऐसे चुनाव जीत कर आए जिनपर आपराधिक मामले दर्ज थे, उनमें से 98 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.वही 2010 विधानसभा चुनाव के बाद जो प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे उनमें 57 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज थे. जबकि 2015 चुनाव के बाद ये प्रतिशत बढकर 58 हो गया.2010 विधानसभा चुनाव के बाद जो विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे उनमें 33 फीसदी विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, जबकि 2015 चुनाव के बाद ये प्रतिशत बढकर 40 फीसदी हो गया.

आरजेडी के 80 में से 34 विधायकों ने खुद पर गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी चुनाव आयोग को दी है. वही जेडीयू के 71 में से 28 एमएलए, बीजेपी के 53 में से 19 विधायक, कांग्रेस के 27 में से 11, सीपीआईएमएल के 3 में से 2, आरएलएसपी के 2 में से 1, एलजेपी के 2 में से 1 विधायक ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है. इनमें हत्या से संबंधित मामले, महिलाओं पर अत्याचार, सांप्रदायिक अशांति फैलाने, अपहरण के मामले शामिल हैं.

आरजेडी के 80 में 46 विधायक, जेडीयू के 71 में 37, बीजेपी के 53 में 34, कांग्रेस के 27 में 16, सीपीआईएमएल के 3 में 3,आरएलएसपी के 2 में से 1, एलजेपी के 2 में से 2 विधायक पर आपराधिक मामला दर्ज है.तमाम दल दावे तो करते हैं कि वह बाहुबलियों को टिकट नहीं देंगे. लेकिन चुनाव के समय उन्हें टिकट देने में पीछे नहीं रहते. पहले राजनीतिक दल बाहुबलियों को चुनते हैं, उसके बाद जनता उन्हें चुनती है.बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में बाहुबली और आपराधिक चरित्र के लोग चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए थे, लेकिन चुनाव आयोग की सख्ती के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार राजनीतिक दलों का रुख क्या होता है.

 

 

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