संवाददाता।वैशाली। महान कवि प्रेमचंद की पावन जयंती के अवसर पर बीएमडी महाविद्यालय, दयालपुर के हिंदी विभाग द्वारा वंचितों के लेखक प्रेमचंद विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कवि एवं हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ महर्षि अखिलेश ने कहा कि प्रेमचंद कालजयी कथाकार थे जिनकी रचना साहित्य में भारतीय ग्राम में जीवन की व्यथा कथा का मर्मस्पर्शी चित्रांकन हुआ है। समाज के हर वर्ग के वंचित, शोषित, सामंती और महाजनि संस्कृति व अंग्रेजों की कुटिल मानसिकता के शिकार भारतीय जनमानस की पीरा का ऐतिहासिक दस्तावेज प्रेमचंद का कथा साहित्य है।
मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देते हुए प्रोफेसर डॉक्टर चंद्रभानु प्रसाद सिंह एवं पूर्व हिंदी विभाग अध्यक्ष एवं मानविकी संकाय अध्यक्ष ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय( दरभंगा) ने कहा कि प्रेमचंद ने कथा साहित्य को महलों से निकाल कर झोपड़ी की दहलीज पर रख दिया। कथा साहित्य ने लोक जीवन के कंटक सुमन से अपना गुलाबी श्रृंगार किया है। उपन्यास सम्राट और कलम के मजदूर और सिपाही मुंशी प्रेमचंद थे।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य एवं विद्वान डॉक्टर तारकेश्वर पंडित ने कहा कि प्रेमचंद वह नाम है जो मात्र हिंदी साहित्य के इतिहास में दर्ज नहीं है बल्कि लोक जीवन के आंगन में जो मंद्र सांद्र स्वर के रूप में घ्वनित हो रहा है।
हिंदी विभाग के वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ सुभाष कुमार ने मंच का बखूबी संचालन किया और सहायक प्राध्यापिका डॉक्टर पूजा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।















