पटना की दीपाली ने ए.आर. रहमान के नए गाने से मचाई धूम

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इशिता स्वाति।पटना। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली गायिका दीपाली सहाय ने एक बार फिर अपने संगीत से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मशहूर संगीतकार ए. आर. रहमान के नवीनतम फिल्मी गीत “तेरे पास मैं (Female Version)” में अपनी आवाज देकर दीपाली ने बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग की शीर्ष श्रेणी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

यह गीत इम्तियाज अली की बहुप्रतीक्षित फिल्म “मैन वापस आऊंगा” का हिस्सा है, जो 10 जून 2026 को रिलीज़ हुई। इस गाने को संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि इसके बोल इरशाद कामिल ने लिखे हैं। भावनात्मक और मधुर प्रस्तुति के कारण यह गीत श्रोताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है

दीपाली सहाय के इस गाने ने न केवल उन्हें राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और संगीत परंपरा को भी एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।

दीपाली सहाय ने अपने करियर की शुरुआत से ही संघर्ष और मेहनत के दम पर एक अलग पहचान बनाई है। माउंट कार्मेल हाई स्कूल और पटना महिला कॉलेज की छात्रा रही दीपाली ने सबसे पहले इंडियन आइडल में फाइनलिस्ट बनकर इतिहास रचा था। वह बिहार की पहली महिला प्रतिभागियों में शामिल रहीं, जिन्होंने इस मंच पर इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।

मुंबई के म्यूजिक स्टूडियो और पुणे के FTII तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि वह केवल प्रतिभाशाली गायिका ही नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत करने वाली कलाकार भी हैं।

दीपाली अक्सर यह बात कहती रही हैं कि देश के कई हिस्सों में भोजपुरी और क्षेत्रीय संगीत को गलत दृष्टि से देखा जाता है। उनका मानना है कि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर बेहद समृद्ध है और उसे सही पहचान मिलनी चाहिए।

बॉलीवुड में सफलता के साथ-साथ दीपाली सहाय बिहार की लोक संगीत परंपरा को भी जीवित रखने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वह दिवंगत लोक गायिका शारदा सिन्हा से गहरी प्रेरणा लेती हैं और बिहार के पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।

उनकी हालिया स्वतंत्र परियोजनाओं में सामाजिक संदेश देने वाला लोकगीत “दुरंगी नीतिया” और पारंपरिक पुरबी लोकगीत “हसी हसी पनवा खियावले बैमनवा” शामिल हैं, जिन्हें श्रोताओं से काफी सराहना मिली है।

“तेरे पास मैं” गीत के साथ दीपाली सहाय ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की प्रतिभा किसी भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकती है। यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक आवाज़ का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

दीपाली सहाय की यह सफलता न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बिहार के उभरते संगीत परिदृश्य के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।

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