संगीतमय प्रेम कहानी, “दिल दीवाना हो गया”

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संवाददाता।मुम्बई।आज के दौर में जब बॉलीवुड में एक्शन, हिंसा और बड़े बजट की फिल्मों का बोलबाला है, ऐसे समय में निर्माता इश्पॉल सिंह चावला ने एक साफ-सुथरी, भावनात्मक और पारिवारिक रोमांटिक फिल्म बनाने का साहस दिखाया है।

दिल दीवाना हो गया केवल एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि रिश्तों, भरोसे, त्याग और पारिवारिक मूल्यों को खूबसूरती से प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने नए कलाकारों पर भरोसा जताकर उन्हें एक बड़ा मंच दिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है।

दिल दीवाना हो गया अपनी सरल कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और मधुर संगीत की वजह से अलग पहचान बनाने में सफल रहती है। इस सप्ताह हॉलीवुड फिल्म स्पाइडरमैन जैसी बड़ी रिलीज के साथ सिनेमाघरों में आने के बावजूद यह फिल्म अपने दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहती है।

फिल्म की कहानी राहुल, नैना और राज नाम के तीन दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ऐसा प्रेम त्रिकोण जिसमें प्यार है, त्याग है, गलतफहमियां हैं और भावनाओं का संघर्ष है। राहुल नैना से प्यार करता है जबकि नैना का झुकाव राज की तरफ है। रिश्तों के इसी उलझे हुए सफर में कहानी आगे बढ़ती है और इंटरवल के बाद कई दिलचस्प मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। फिल्म का क्लाइमेक्स भी दर्शकों को चौंकाने में सफल रहता है।

लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री काजल चौहान ने बड़े पर्दे पर बेहद प्रभावशाली शुरुआत की है। नैना के किरदार में उनकी मासूमियत, भावनात्मक अभिव्यक्ति और स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावित करती है। वह हर फ्रेम में सहज और स्वाभाविक नजर आती हैं। भानूज सूद ने राहुल के किरदार में जान डाल दी है। उनकी अभिनय क्षमता देखकर कहीं से महसूस नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म है। काजल चौहान और भानूज सूद की केमिस्ट्री भी पर्दे पर काफी अच्छी लगती है। वहीं शुभकरण भोपाल ने राज के किरदार में अपनी अलग पहचान बनाई है।

निर्देशक राजीव शामलाल सोनी ने इस फिल्म को सिर्फ एक रोमांटिक कहानी के रूप में नहीं पेश किया बल्कि इसे पारिवारिक मूल्यों और भावनाओं से जोड़कर एक संपूर्ण मनोरंजक फिल्म बनाई है। उनकी कहानी कहने की शैली सरल है लेकिन प्रभावी है।

तकनीकी पक्षों में फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ इसका संगीत है। संगीतकार विष्णु नारायण ने ऐसा मधुर संगीत दिया है जो 90 के दशक की रोमांटिक फिल्मों की याद ताजा कर देता है। आज के शोर-शराबे वाले संगीत के दौर में फिल्म के गीत कानों को सुकून देते हैं। “तू मेरे दिल की दुआ है”, “दिल की ये गुजारिश है” और “प्यार की धुन” जैसे गीत फिल्म की आत्मा बनकर उभरते हैं। फिल्म की खूबसूरती को बढ़ाने में मनाली की मनमोहक लोकेशन्स का भी बड़ा योगदान है। फिल्म के संवाद भी इसकी विशेषता हैं।

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