संवाददाता।जमुई।डीएम की अध्यक्षता में समाहरणालय के कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला उर्वरक निगरानी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में कम वर्षापात से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा किए जाने के साथ जिले में कृषि की वर्तमान चुनौतियों और किसानों को राहत पहुंचाने के उपायों पर मंथन किया गया। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में धान के बिचड़े के आच्छादन के लक्ष्य का 98 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है परंतु वर्षापात काफी कम होने के कारण मुख्य धान की रोपनी की गति अत्यंत नगण्य है।
बताया गया कि जिले में कुल लक्षित आच्छादित रकवा 69501.20 हेक्टेयर निर्धारित है जिसके विरुद्ध अब तक मात्र 332.50 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपनी हो सकी है जो कुल लक्ष्य का महज 0.48 प्रतिशत है। इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए प्रतिनिधियों ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली आकस्मिक फसलों के बीज अविलंब उपलब्ध कराने का बहुमूल्य सुझाव दिया।
कम वर्षा से उत्पन्न होने वाली संभावित आपदा को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने बेहद संवेदनशीलता के साथ निर्देश दिया कि अब से प्रत्येक सोमवार को अनिवार्य रूप से आपदा प्रबंधन समिति की विशेष बैठक आयोजित की जाए ताकि कृषि और जल संरक्षण से जुड़ी जमीनी स्थितियों की निरंतर समीक्षा की जा सके। जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा जिले में खाद की उपलब्धता पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि वर्तमान में जिले के तमाम थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के पास डी०ए०पी० एन०पी०के० एम०ओ०पी० एस०एस०पी० एवं यूरिया प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है जिससे किसानों को किसी भी तरह की किल्लत नहीं होगी।
इसके साथ ही जुलाई माह के अंत तक जिले की मांग के अनुसार उर्वरकों की अतिरिक्त खेप भी मंगा ली जाएगी। किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर ही खाद उपलब्ध हो और इसके वितरण में पारदर्शिता बनी रहे इसके लिए जिला कृषि कार्यालय में एक विशेष उर्वरक हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किया गया है। किसान किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या के समाधान के लिए मोबाइल नंबर 6203941526, 9801465530 एवं 7903892185 पर सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे के बीच सीधे संपर्क कर सकते हैं
















