पड़ताल

जानें…झारखंड के आदिवासी बाहुल दामूडीह की बेमिसाल कहानी

हिमांशु शेखर.रांची. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड का दामूडीह गांव जनजाति बाहुल गांव है, बावजूद वहां शराब पीने वाले को न केवल...

पंद्रह वर्षों बाद फल्गु का रौद्र रूप,मगध में मचाई तबाही

निशिकांत सिंह.साल भर सुखी रहने वाली फल्गु नदी पंद्रह साल बाद मचा रही तबाही. दो दिनों से बिहार के मगध प्रमंडल क्षेत्र में खासकर...

नीलगाय से बढती बर्बादी,किसानों का त्राहिमाम

अनूप नारायण सिंह.पटना.कभी बिहार के दियारा इलाके में इक्का-दुक्का की संख्या में गाहे-बगाहे नजर आने वाली नीलगायों की संख्या में अचानक काफी वृद्धि हुई...

नोटबंदी के कारण मौत,कितना सच-कितना झूठ

अरुण साथी. नोटबंदी ने एक बार फिर पत्रकारिता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अंधभक्ति और अंधविरोध। चैनल पे यही दिखता है। ग्रामीण रिपोर्टर...

बाढ़ नियंत्रण के बदले अब किया जायेगा बाढ़ प्रबंधन

दिनेश मिश्रा. आज़ाद भारत में बिहार में  1948 में आयी पहली बाढ़ पर बहस चल रही थी. तब दीप नारायण सिंह सिंचाई मंत्री थे। उनका...

खादी कभी थी आजादी की वर्दी

के. विक्रम राव.                   अपने घंटेभर के उद्बोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 31 जनवरी 2022 को...

आदिम जनजाति के विशेष आरक्षण का दिखने लगा असर

संवाददाता. रांची.कोरोना से फिलहाल जूझ रहे झारखंड ने आदिम जनजाति के लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के मोर्चे पर बड़ी छलांग लगाई है। एक...

भूख से मर रहे दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए जिम्मेवार कौन ?

डॉo सत्यवान सौरभ. कोरोना आपदा के कारण सबसे बड़ा संकट दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए हुआ है। जिनके बारे देश के अंदर बहुत ही कम चर्चा...

मजदूरों के गुनाहगार और भी हैं…?

राकेश प्रवीर. क्या सिर्फ गरीब, दिहाड़ी मजदूर ही समस्याग्रस्त है? क्या और किसी कामगार वर्ग पर लॉकडाउन का प्रभाव नहीं पड़ा है? ऐसा नहीं है...

चौपट होती कानून व्यवस्था,सरेआम हत्या-लूट-डकैती

निशिकांत सिंह. पटना. विगत कुछ दिनों से राज्य में अपराधिक घटनाओं में वृद्धि हुई है. राज्य के हर कोनें में कहीं न कहीं हत्या-रंगदारी की...
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