भोजपुरी गीतों की अश्लीलता पर रोक के लिए राज्य सेंसर बोर्ड की मांग

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संवाददाता.पटना.फ़िल्म “नमस्ते बिहार” के निर्माता एवं अभिनेता राजन कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर राज्य में सेंसर बोर्ड के गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में लोक गीत संगीत और भोजपुरी गाने के नाम पर धड़ल्ले से अश्लीलता परोसी जा रही है। भोजपुरी गीत के नाम पर बहन, चाची, लईकी, भउजी, साली जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए रिश्तों को भी बदनाम किया जा रहा है। पिछले दिनों कई भोजपुरी कलाकारों द्वारा परोसी गई अश्लीलता पर सोशल मीडिया पर काफी हंगामा भी हुआ। बात मीडिया में भी आई मगर इस समस्या पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

हालांकि हाल ही में सांसद रवि किशन शुक्ला ने भी भोजपुरी फिल्मों और गानों के जरिये समाज में फैलाई जा रही अश्लीलता पर रोक लगाए जाने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है। और अब बिहार पुत्र और “नमस्ते बिहार” फ़िल्म के निर्माता हीरो राजन कुमार के द्वारा बिहार में सेंसर बोर्ड स्थापित करने की मांग की गई है।

इस बाबत बाफ्टा BFTAA (बिहार फ़िल्म एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन) के फाउंडर प्रेसिडेंट हीरो राजन कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा है जिसमें उनका ध्यान समाज की इस गंदगी की तरफ देने की गुहार लगाई है। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि बिहार में भोजपुरी गानों और फुहड़ फिल्मों के द्वारा अश्लीलता का बाजार गरम है, जो समाज और हमारी सांस्कृतिक विरासत को एक बड़ा खतरा है।उन्होंने नीतीश कुमार से अश्लील गीत संगीत और फूहड़ता फैलाने वाली फिल्मों पर अंकुश लगाने के लिए बिहार में सेंसर बोर्ड की स्थापना की अपील की है।

राजन कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि बिहार अपनी कला संस्कृति, गीत संगीत और लोकगीत की महत्ता और खूबसूरती की वजह से सारी दुनिया मे मशहूर है। बिहार के पारम्परिक लोकगीतों को सुनते ही दिल दिमाग को बहुत सुखद अनुभव होता है परन्तु, दुःख की बात यह है कि आज लोकगीत के नाम पर अश्लील गीत संगीत तैयार किए जा है जिन पर लड़कियों से उत्तेजक डांस करवाए जा रहे है। जिसका दुष्परिणाम ये हो रहा है कि आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है और हमारा युवा भटकता जा रहा है। अब तो, शादी-व्याह, तिलक, जन्मदिन और छोटे-छोटे उत्सवों पर भी अश्लील गीत संगीत बजाकर और इस तरह के कार्यक्रम कर इनको फलीभूत किया जा रहा है। निजी सवारी, सामान ढोने वाले वाहन, चौक-चौराहा, ऑटो-टेम्पो, बस और ट्रेक्टर में धड़ल्ले से ऐसे द्विअर्थी गाने बज रहे है। यही सब सुनकर, कुछ मनचले युवक रास्ते पर, सफर में अकेले चल रही बहु-बेटियो पर छींटाकशी करते है। इसलिए बिहार कला संस्कृति के सम्मान हेतु, इसपर जल्द से जल्द अंकुश लगाने की जरुरत है।

राजन कुमार ने मुख्यमंत्री को निवेदन के साथ कुछ सुझाव भी दिए हैं जो बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनकी अपील है कि बिहार में फिल्म प्रमाणन बोर्ड की स्थापना हो जो म्यूज़िक वीडियो और फिल्म को सेंसर करके पास करे। कला संस्कृति विभाग के अधिकारिक वेबसाइट पर सभी कलाकार/फिल्मकार/गीतकार/संगीतकार/ और फिल्म निर्देशक का कोई सरकारी पहचान पत्र के साथ ऑनलाइन पंजीकरण हो।बिहार में एक राज्य और प्रमंडलवार गीत/संगीत और फिल्म परामर्शी समिति का गठन हो, जो भोजपुरी, सहित कई रीजनल भाषाओं पर आधारित गीत/संगीत को देखकर कर अनुमति दे।सभी रिकॉर्डिंग स्टूडियो को गीत-संगीत रिकॉर्डिंग मार्गदर्शिका प्रदान किया जाय और यह सुनिश्चित किया जाय कि इसका अनुपालन कड़ाई से हो।विधानसभा/विधान परिषद में अश्लील गीत/ संगीत और फूहड़ फिल्म के विरुद्ध एक अध्यादेश पारित कराकर एक कड़ा कानून बनाया जाय। जिसका सख्ती के साथ अनुपालन हो ताकि कोई कलाकार अश्लील गीत/ संगीत और फूहड़ फिल्म बनाने के लिए नहीं सोचे।

 

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