क्या है नीतीश कुमार का अगला प्लान ?

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प्रमोद दत्त.

पटना. नीतीश कुमार का बार-बार यह दोहराया जाना कि वे सीएम नहीं बनना चाहते थे और यह भी कहना कि सरकार पूरे पांच साल चलेगी- साफ संकेत है कि एनडीए के अंदरखाने में सबकुछ ठीक नहीं है.अगर भाजपा ने अपने सारे पत्ते खोल दिए तो नीतीश कुमार क्या करेंगें ?दरअसल वैसी परिस्थितियों के लिए ही नीतीश कुमार भविष्य का प्लान बना रहे हैं.उनका हर बयान उसी प्लान का संकेत है.

भाजपा से गठबंधन बनाए रखने के लिए नीतीश कुमार को पिछले दिनों अपना स्टैंड बदलना पड़ा है.सीएए और धारा-370 प्रकरण में स्वीकार्यता के साथ नए-नए तर्क गढने पड़े हैं.कहा गया जदयू के एजेंडे में तो नहीं था लेकिन देश के संसद ने कानून बना दिया तो कानून का पालन करना ही धर्म है.

प्रेक्षकों का मानना है कि बिहार में पहले से दूसरे और फिर तीसरे नंबर पर पहुंचे जदयू के सामने जनाधार बढाने के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष छवि को बचाए रखने की चुनौती है.अरूणाचल प्रदेश की घटना के बाद से यह माना जा रहा है कि जिस भाजपा की दोस्ती ने उन्हें राजनीति के शीर्ष तक पहुंचाया वही भाजपा जदयू को निगल जाने की तैयारी कर रही है.भाजपा ने अपने तरकश से बाकी तीर निकाल कर चलाए तो वह तीर सबसे ज्यादा जदयू को ही घायल करेगा.

केन्द्र में मजबूत मोदी-सरकार एक-एक कर अपने एजेंडे पर काम कर रही है.2024 लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा द्वारा कुछ ऐसे काम किए जा सकते हैं जिससे जदयू को या तो बैकफुट पर जाना होगा या स्वीकार्यता के लिए फिर नए तर्क गढने पड़ेंगें.सूत्रों की माने तो भाजपा समान नागरिकता कानून और जनसंख्या नियंत्रण कानून शीघ्र लाएगी. इसके अलावा असम पैटर्न पर देश भर के मदरसों पर भी गाज गिराई जा सकती है.

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चली एनडीए सरकार के दौरान कुछ ऐसे निर्णय लिए गए जिसे नहीं चाहते हुए भी भाजपा को स्वीकारना पड़ा.चाहे किशनगंज में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शाखा की स्थापना का मामला हो या महाबोधी मंदिर कमिटी (बोधगया) के गठन में नियमों का बदलाव,भाजपा को कड़ुवे घूंट पीकर स्वीकारना पड़ा.क्योंकि तब केन्द्र में भाजपा सरकार नहीं थी और बिहार में भाजपा को नीतीश की वैशाखी की जरूरत थी.बिहार में नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित कुछ मदरसों में संदेहात्मक गतिविधियां पर रोक और बिहार में बंगलादेशी घुसपैठ पर कार्रवाई भी भाजपा के एजेंडे में रहा है.लेकिन गठबंधन सरकार की मजबूरी के कारण भाजपा ने मौन साध रखा था.

भाजपा नेतृत्व को लगता है कि 2024 में पुन: केन्द्र में सरकार नहीं बनी तो उनके एजेंडे का क्या होगा.इसलिए भाजपा केन्द्र की वर्तमान मजबूत सरकार के दौरान ही सारे प्रमुख एजेंडे पर काम कर लेना चाहती है.भाजपा को लगता है कि बाद की किसी सरकार के लिए उनके निर्णय को पलटना मुश्किल होगा क्योंकि उन्हें तब बहुसंख्यक हिन्दुओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा.

बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू नेता नीतीश कुमार को भी इसका अहसास है.विगत चुनाव में मजबूती के साथ उभरते तो पहले के जैसा किसी निर्णय का विरोध कर सकते थे.अब उनके सामने दो ही विकल्प बचते हैं.या तो भाजपा के हर निर्णय को स्वीकारें या मैदान छोड़ सक्रिय राजनीति से बाहर हो जाएं.नए तर्क गढकर सीएम बने रहने की स्थिति नहीं बनी तो अपनी छवि बनाए रखने के लिए वे दूसरे विकल्प सहारा ले सकते हैं.पांच साल सरकार चलने की बात कहकर जहां वे कार्यकर्ताओं का हौसला बनाए रखना चाहते हैं वहीं सीएम नहीं बनने की अपनी इच्छा को सार्वजनिक कर पहले से पृष्ठभूमि बना रहे हैं.पार्टी के नेतृत्व का त्याग करना भी इसी पटकथा का हिस्सा है.इस प्रकार नीतीश कुमार भविष्य के प्लान पर काम कर रहे हैं.

 

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सन् 1980 से पत्रकारिता. 1985 से विभिन्न अखबारों एवं पत्रिकाओं में विभिन्न पदों पर कार्यानुभव. बहुचर्चित चारा घोटाला सहित कई घोटाला पर एक्सक्लुसिव रिपोर्ट, चारा घोटाला उजागर करने का विशेष श्रेय. ‘राजनीति गॉसिप’ और ‘दरबारनामा’ कॉलम से विशेष पहचान. ईटीवी बिहार के चर्चित कार्यक्रम ‘सुनो पाटलिपुत्र कैसे बदले बिहार’, साधना न्यूज और हमार टीवी के टीआरपी ओरियेंटेड कार्यक्रम ‘पड़ताल - कितना बदला बिहार’ के रिसर्च हेड और विभिन्न चैनलों के लिए पॉलिटिकल पैनलिस्ट. संपर्क – 09431033460

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