पुस्तक मेला में मंच और अभिनय का समागम

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संवाददाता.पटना.समय इंडिया( नई दिल्ली) की ओर से यहां गांधी मैदान में आयोजित 12 दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला में शनिवार का दिन बेहद खास रहा। पुस्तक प्रेमियों ने पसंदीदा पुस्तकों की जोरदार खरीदारी के बीच नुक्कड़ नाटक और एकल काव्य पाठ और फिर एक के बाद अनेक कविताओं का लुत्फ उठाया। शाम को 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कहानी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शनिवार होने की वजह से सुबह से ही पुस्तक प्रेमियों, खासकर विद्यार्थियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को किया जागरूक

समय इंडिया के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने बताया कि भरी दोपहरी में एबीसी कालेज आफ एडुकेशन, पटना की ओर से पर्यावरण जागरुकता पर केंद्रित नुक्कड़ नाटक ‘प्लास्टिक को उम्रकैद- हरियाली को रिहाई’ का मंचन मेला परिसर के बीचोबीच किया गया। डा. पल्लवी विश्वास के लेखन और निर्देशन में कालेज के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने पुस्तक प्रेमियों को यह संदेश देने का सार्थक प्रयास किया कि यदि हम अब भी नहीं चेते तो भविष्य में हमें तबाही से कोई नहीं बचा सकता। हाल ही में पटना में भारी जलजमाव हुआ था और शहरवासी कई दिनों तक परेशान रहे थे। ऋषिकेश पांडेय ने पगला बाबा, जबकि मणिकांत दूबे और शोभा रानी ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। आयुषी, नीतेश, उदय भारद्वाज, अनुपमा आदि ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई। कार्यक्रम में शिक्षक की भूमिका पार्थसारथी, ऐश्वर्या साहा तथा प्रियंका भारद्वाज ने निभाई।

‘ठोकरें खाते हुए गिरने. संभलने दो’

मेला के मीडिया प्रभारी अशोक प्रियदर्शी के अनुसार दोपहर बाद साहित्य और समाज को जागरूक करती संस्था लेख्य-मंजूषा के तत्वावधान में जयप्रकाश भारती सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मंच पर सर्वप्रथम विभिन्न विधाओं के धनी कवि सुनील कुमार ने एकल पाठ किया। पटना उच्च न्यायालय में कार्यरत श्री कुमार की कविता- ठोकरें खाते हुए गिरने संभलने दो, जिंदगी के हादसों में खुद को पलने दो… ने खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के अध्यक्ष डा. सतीशराज पुष्करणा ने किया। मुख्य अतिथि डा. अनिता राकेश तथा कवि घनश्याम की मौजूदगी में कवियों ने अपने मुक्तक, गजल, गीत, छंद एवं कविता से उपस्थित श्रोताओं, कवियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिलाषा कुमारी, अमृता सिन्हा, वीणाश्री हेम्ब्रम, एकता कुमारी, मीरा प्रकाश, प्रियंका श्रीवास्तव, शाइस्ता अंजुम, सीमा रानी, ज्योति स्पर्श, डा. सुधा सिन्हा, डा. कल्याणी कुसुम, पूनम करतियार, राजकांता राज, नूतन सिन्हा आदि ने अपनी प्रस्तुति दी। मंच संचालन लेख्य-मंजूषा की अध्यक्ष विभारानी श्रीवास्तव और धन्यवाद ग्यापन रवि श्रीवास्तव ने किया।

भविष्य के कहानीकार हैं ये युवा : प्रभाकर

मेला में शाम को 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कहानी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अनेक उभरते कहानीकारों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। ज्यूरी में शामिल वरिष्ठ साहित्यकार और कवि 86 वर्षीय श्याम बिहारी प्रभाकर ने इन युवाओं की कहानियों को पढ़कर काफी खुशी जताई और कहा कि इनमें मैं भविष्य का कहानीकार देख रहा हूं। ज्यूरी के दूसरे सदस्य वरिष्ठ कवि और साहित्यकार डा. विनय कुमार विष्णुपुरी ने कहा कि इनमें से कई युवाओं में अच्छी संभावना है। मैं उम्मीद करता हूं कि इनमें से कई भविष्य में अच्छे कहानीकार बन सकते हैं।

फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता रविवार को

मेला की प्रबंधक दीपा कुमारी ने बताया कि रविवार को मेला परिसर में अन्य कार्यक्रमों के अलावा फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। इसमें भाग लेने के इच्छुक लोग मेला के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेला में देश के अनेक नामचीन प्रकाशक आए हुए हैं। इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट और प्रकाशन विभाग, भारत सरकार के अलावा बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, विद्यार्थी बुक्स, शांति संदेश पुस्तकालय समेत 80 प्रकाशक और वितरक शामिल हैं।

 

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