फिर सामने आई नीतीश कुमार की चाणक्य नीति

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प्रमोद दत्त.

पटना.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति में चाणक्य कहा जाता है.चुनाव के ठीक पहले दल-बदल के खेल में दूसरों पर भारी पड़ते नीतीश कुमार की चाणक्य नीति एक बार फिर सामने आई है.उनपर दबाव बनाने वाली लोजपा का पासा पलटता नजर आने लगा है.

चुनाव की आहट के साथ ही लोजपा ने एनडीए में अपनी हिस्सेदारी बढाने के लिए दबाव की राजनीति शुरू की.नीतीश कुमार पर बयानो के तीर चलाए जाने लगे. लोजपा द्वारा खुद को भाजपा के करीब बताते हुए जदयू से दूरी बनाने की कोशिश की गई.चिराग पासवान ने तो यहां तक कह दिया कि जदयू उम्मीदवारों के खिलाफ लोजपा अपना उम्मीदवार उतारेगी. दूसरे मंचों से चिराग पासवान को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर नीतीश के सामने चिराग को खड़ा कर दिया गया.इसी बीच श्याम रजक प्रकरण भी सामने आ गया.उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया गया तो वे राजद में चले गए.सार्वजनिक तौर पर नीतीश कुमार की छवि दलित-विरोधी की बनाई जाने लगी.

इस छवि को मिटाने और दलित वोट का संतुलन बनाने को उद्देश्य से नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री व हम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी को पटा लिया.राजद से नाराज चल रहे मांझी को फिर गले लगा लिया.जबकि मांझी को मुख्यमंत्री बनाने वाले नीतीश कुमार का इनसे छत्तीस का रिश्ता बन गया था और मांझी भी दिन-रात नीतीश की आलोचना करते थे. लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि झटपट मांझी की हर मांग को स्वीकारते हुए नीतीश कुमार उन्हें एनडीए फोल्ड में ले आए. महागठबंधन से बाहर आने और एनडीए में वापसी की घोषणा के साथ ही जीतनराम मांझी चिराग पासवान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.अगले दिन ही मांझी बोले- नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी.चिराग आवाज उठाए तो दूंगा करारा जवाब.उन्होंने यह घोषणा भी कर दी कि अगर लोजपा जदयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी तो वे भी लोजपा उम्मीदवारों के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतार देंगे.

मुस्लिम-यादव (माई) राजद का आधार वोट रहा है.नीतीश कुमार की चाणक्य नीति इस वोट बैंक में सेंधमारी करती दिख रही है.हाल के दिनों में राजद के 12 विधायकों(7 विधानसभा सदस्य व 5 विधान परिषद सदस्य) को जदयू में शामिल करवाना इसी का संकेत है.इनमें से चंद्रिका राय लालू प्रसाद के समधी हैं.दामाद तेजप्रताप और पूरे परिवार से प्रताड़ित होकर चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय को ससुराल छोड़ना पड़ा है.शिक्षित,भले व व्यवहार कुशल नेता चंद्रिका राय प्रतिष्ठित नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के पुत्र हैं.चंद्रिका राय का राजद छोड़कर जदयू में शामिल होने का संदेश यादव मतदाताओं पर प्रभाव डाल सकता है.

बिहार की राजनीति में रामलखन सिंह यादव का बड़ा प्रभाव रहा है.कांग्रेस के दिनों में केन्द्रीय मंत्री से लेकर कई बड़े पदों पर रहे.लालू प्रसाद के पहले रामलखन सिंह यादव ही यादवों के सर्वमान्य नेता रहे.इनका पौत्र जयवर्द्धन यादव (विधायक) ने भी राजद छोड़कर जदयू का दामन थामा है.इसी प्रकार राजद में मुस्लिम वोट पर प्रभाव रखनेवाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली असरफ फातमी के पुत्र फराज फातमी (विधायक) का राजद छोड़ जदयू में शामिल होने को भी राजद के माई समीकरण में सेंधमारी मानी जा रही है.

प्रेक्षकों का मानना है कि राजद को शुरूआती झटका देने के बाद मुख्यमंत्री व जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार शांत बैठने वाले नहीं हैं.जदयू नेताओं का दावा है कि राजद का कुनबा बिखरने वाला है और अभी कई नेता राजद छोड़ जदयू में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं.

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