जानें…आपके बच्चे को गुस्सा क्यों आता है?

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डा.मनोज कुमार.

अंधेरी रात और सड़क वीरान सा।मुकांबो खाली पङे शीतल पेय के कनस्तर को ठोकर मार रहा था।अपनी दायी ओर पुलिस जिप्सी देख  जोर से लात मारी‌।बहुत से विख्यात कंपनियों की एड की ओर देख अजीब सा मुंह बनाया।पटना के बेली रोड पर खङी एक रिक्शे की हवा निकाल हंसने लगा।दाहिने ओर चौराहे पर आकर दहाड़ मार शासन व्यवस्था को कोसने लगा।

वह स्कूल के शिक्षकों को गाली दे रहा था।अचानक पीछे से हार्न के प्रेशर से उसकी तंद्रा टूटी।वह एक पल के लिए रूका।अचानक वह ऑटो वाले से लड़ने लगा।ताबड़तोड़ चीख-चीख कर उसका गला सूखने लगा। बहुत देर बाद उसे ऐसा लगा की बारिश हो रही।वह अपने बाये हाथ से चेहरे पर पड़े पानी की कुछ छीटों को पोछने लगा ।वह आंखें खोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे लग रहा की कोई तेज रोशनी चमक रही।

धीरे धीरे वह हिम्मत कर आंखों को खोला।अब उसके पैरो तले  धरती खिसक चुकी थी।पुलिस की  रौबदार आवाज।वह सङक पर लड़ते लड़ते बेहोश हो गया था।17 साल की उम्र।गले में पटना के एक प्रतिष्ठित स्कूल का आई कार्ड ।गोरा चेहरा।गले पर तिल।आंखे ऐसी की जैसे कई रात न सोयी हुई हो।रात्री ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश उधेड़बुन में थे।

दरअसल, मोगाबों अपने गुस्से की आदतों से शहर में चर्चित रहा है। अपनी इस आदत की वजह से वह घर के लोगों से पहले ही काफी दूर हो चुका।बहन को भी मारा।मम्मी पर अक्सर हाथ उठा देता।बचपन से वह जब भी किसी की गलती देखता तब उसे वह टोकना चाहता।टोकता भी।दुकानदार की हरकत हो।

गलत तरीके से दिखाया जाने वाला एडवरटाइजिग के खिलाफ उसका गुस्सा सांतवे आसमान पर होता था।टीचर की बुरी आदतें वह नोटिस करता।कभी भी उसकी बात पर लोगों ने नोटिस नही किया।आज जब वह उम्र के सत्रहवें बसंत पार कर रहा।तब भी वह महसूससता है कि उसे इग्नोर किया जा रहा।

बिहार के एक महत्वपूर्ण जिले में उसके पिता एडीएम रैंक के वरीय आंफिसर रहे हैं।फिर भी उसको कोई नही समझ सका।उसका गुस्सा अब धार्मिक, पोलिटिकल घटनाक्रम में भी उबल पड़ता है।अबतक वह अपने गर्लफ्रेंड, टीचर,नेता,पुलिस और न जाने अनगिनत लोगों से दुश्मनी के पीछे उसका यह भावनात्मक उबाल ही रहा।

पटना में किसी की सलाह पर उनकी मेरे पास काउंसलिंग हो रही।

दरअसल,हमसब अपने व्यस्ततम जीवनशैली में अपने बच्चों को इग्नोर कर देते है।खासतौर से जब उन्हें कुछ कहना होता है।नतीजतन इरादा नेक होने के बावजूद भी परिणाम भयावह आने शुरू हो जाते हैं।

(लेखक डा.मनोज कुमार,पटना में काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट है।इनका संपर्क नं-9835498113,8298929114 है।)

 

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