भूदान की जमीन पर सरकारी कब्जा का आरोप

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संवाददाता।गया जी। संत विनोबा भावे की 131वीं जयंती पर बोधगया सिलौंजा स्थित कोमल पूजन पब्लिक स्कूल के सभागार में लोक समिति और मजदूर-किसान समिति के संयुक्त तत्वावधान में सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन की अध्यक्षता लोक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जमुनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित गिरिजा सतीश ने की, जबकि संचालन राजेंद्र मांझी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत विनोबा भावे के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि से हुई।लोक समिति के राष्ट्रीय संयोजक कौशल गणेश आजाद ने कहा कि विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गागोद में हुआ था। वर्ष 1916 में महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए और गांधीजी के प्रथम सत्याग्रही बने। आजादी के बाद उन्होंने भूदान आंदोलन के माध्यम से देश में सामाजिक बदलाव की बड़ी पहल की। इस आंदोलन में लाखों एकड़ जमीन भूमिहीनों और दलितों के बीच बांटी गई, जिससे बड़ी संख्या में भूमिहीन किसान बने।

आजाद ने कहा कि बिहार में भूदान की जमीन को सरकार द्वारा अपने अधीन किए जाने से भूदान से जमीन पाने वाले किसान परेशान हैं और उन्हें अपने अधिकार के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।जेपी सेनानी उपेंद्र सिंह ने विनोबा भावे को महान संत और समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने गैरबराबरी छुआछूत और लिंगभेद के खिलाफ लगातार संघर्ष किया। दलितों को मंदिर प्रवेश दिलाने के अभियान के दौरान देवघर मंदिर में उन पर हमला भी हुआ जिसमें कान में गंभीर चोट लगी और वे हमेशा के लिए एक कान से सुनने में असमर्थ हो गए। इसके बावजूद उनका समाज सुधार का अभियान नहीं रुका।

सम्मेलन को लोक समिति की जिला अध्यक्ष पुतुल कुमारी, मजदूर किसान समिति के जिला संयोजक बिशुनधारी यादव समेत अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। मौके पर समिति के पूर्व सदस्य सुखदेव सिंह, किशोरी यादव, बलराम सिंह, जगदेव सिंह, ईश्वर साव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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