डाक्टर का पूरा परिवार बना है कोरोना योद्धा

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सुधीर मधुकर.पटना. इंसान तो घर में पैदा होते हैं,परन्तु इंसानियत कुछ ही घरों में जन्म लेती है | ऐसा ही एक घर-परिवार बिहार के जाने-माने पटना एम्स कार्डियोलॉजी विभाग हेड डॉ. संजीव कुमार एवं आई केयर क्लिनिक कंकड़बाग में कार्यरत इनकी पत्नी प्रसिध्द नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना कुमार और कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ,मनीपाल  से इन्टर्नशिप कर रही  बेटी आनवी अलक्षया डाक्टर है |

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच डॉक्टरों की चुनौती बहुत बड़ी है, ऐसे में  माँ,पिता और पुत्री तीनों ही अलग-अलग अपनी-अपनी कोरोना वारियर्स की भूमिका का बखूबी निभा रहे हैं | खास कर डॉ.संजीव की बेटी आनवी अलक्षया | लेकिन यह कोई अकेला डॉ.संजीव,डॉ.रंजना,आनवी या इसका परिवार नहीं है ,लाखों डाक्टर और उनका परिवार होंगे जो जान को जोखिम में डाल कर , आज पहली बार इस वैश्विक महामारी कोरोना जैसे संक्रमण रोगियों को बचाने में दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं | संभव है इस तरह की बीमारी किसी भी चिकित्सकों के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है | इस कार्य के लिए ऐसे चिकित्सकों के लिए निश्चित रूप से, एक ‘सलाम’ तो बनता है | आनवी अलक्षया का कहना है कि ऐसे तो चिकित्सा के क्षेत्र में मेरी अनुभव काफी नहीं है ,पर अभी तक जो भी रोगियों की सेवा करने का मौका मुझे मिली है,इतना ही कहूँगी,रोगियों की सेवा से जो सुख मिलता है उसकी अनुभूति से ही ख़ुशी मिलती है | एक पल के लिए ही सही किसी औरों  के चेहरे की मुस्कान बनने में जो ख़ुशी है ,इस अनिभूति का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता है |

पिता डॉ.संजीव और माँ डॉ.रंजना का कहना है कि ,डाक्टर को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है,भगवान के बाद लोगों की जिन्दगी डाक्टरों के हाथ में है ,ऐसा माना जाता है ,और किसी भी चिकित्सकों के लिए यह उच्च सम्मान पद ,उसे कर्तव्य बोध कराने के लिए ही काफी है | स्वभाव से काफी मिलनसार और मरीजों से फ्रेंडली रूप से पेश आने वाले डॉ संजीव अपनी चिर परिचित मुस्कान के लिए भी प्रसिद्ध हैं ।  इनका कहना है कि हमें भी फक्र है की मेरी  बेटी आनवी अलक्षया पर,जो वैश्विक महामारी कोरोना से  लड़ने वाले मरीजों और कोरोना के प्रति जागरूकता का काम इस उम्र से ही कर रही है | खास कर एक डॉक्टर पिता और माँ के लिए यह बहुत ही गर्व करने वाली बात है |

डॉ.संजीव ने बताया की शुरूआत में जब कोरोना का प्रसार सामने आया तो खुद वह भी सात दिनों तक वे अपने पटना के कंकड़ बाग़ स्थित घर भी नहीं जा सके थे | ऐसी परिस्थितियों में भी उनका परिवार का पूरा सहयोग उन्हें मिलता रहा और अब जब उनकी बेटी आनवी अलक्षया भी मनीपाल हॉस्पिटल में कोरोना वारियर्स की टीम में शामिल होकर अपनी सेवा दे रही है | कोरोना वारियर्स की सेवा के दबाव के बीच भी समय निकाल कर अपनी बेटी से वीडियो कॉल करके पिता पुत्री दोनों एक दूसरे का हाल चाल लेते रहते हैं | ऐसे समय में जब हज़ारों स्वास्थ्यकर्मी ख़ुद कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं वैसे में थोड़ी चिंता तो बेटी के लिए होती ही है ,लेकिन बेटी से बातचीत कर निश्चिंत हो जाता हूँ | डॉ संजीव ने कहा की मैं या मेरा परिवार ही नहीं ,आज स्वास्थ्यकर्मी दुनिया भर में कोविड-19 के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई की एक बड़ी कीमत चुका रहे | कोरोना से ये लड़ाई वायरस और आपके इम्यून सिस्टम के बीच होती है | किसी के अंदर जितने ज़्यादा वायरस होंगे, उसके दूसरों को संक्रमित करने की आशंका भी उतनी ही ज़्यादा हो जाती है | ऐसे में जितने ज़्यादा वायरस होंगे, शरीर को उतनी ज़्यादा मेहनत भी करनी पडती है | चिकित्सकों  और कोरोना वारियर्स इतनी मुश्किलों बड़ी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कोरोना को हराने में जुटे हैं | डॉ संजीव बताते हैं की पटना के कंकड़बाग़ स्थित अपने घर से जब वे एम्स के लिए निकलते हैं तो अपने साथ ही परिवार के दूसरे सदस्यों की चिंता भी घेरे रहती है | साथ ही हम इस अंदाज़े पर काम कर रहे हैं कि जो मरीज़ दूसरी बीमारियों के लिए हमारे पास आ रहे हैं वे कोरोना वायरस से पीड़ित नहीं हैं या वे इस वायरस के कैरियर नहीं हैं |इस तरह से हम फ्रंटलाइन वर्कर्स के तौर पर इस महामारी से लड़ रहे हैं |

माँ डॉ.रंजना का कहना है कि बेटी आनवी अलक्षया यहाँ से 1500 दूर उडुपी जिले के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मणिपाल में इंटर्न है। आनवी पटना के सेंट जोसेफ कौन्वेन्ट  स्कूल की छात्रा थी। एमबीबीएस की परीक्षा मार्च में  पास होते ही देश कोरोना की चपेट में आ गया था, और छुट्टियों में लॉकडाऊन होने से आनवी  घर भी नहीं आ सकी। वहाँ इसे भी कोविड की  टीम में रखा गया। तब से वो वहाँ कोरोना के रोगियों की देखभाल के लिए लगी हुई हैं। इस संकट की घड़ी में समय निकाल कर अपनी बेटी से वीडियो कॉल कर के हम पति-पत्नि दोनों, पुत्री से एक दूसरे का हाल चाल लेते रहते हैं

 

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