संवाददाता। पटना।सनातन संस्था ने वैलेंटाइन डे को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर “सांस्कृतिक आघात” बताते हुए युवाओं से इससे दूर रहने की अपील की है।
संस्था द्वारा जारी लेख में कहा गया है कि भारतीय संस्कृति त्याग, संयम और साधना पर आधारित है, जबकि वैलेंटाइन डे पाश्चात्य प्रभाव से उपजी ऐसी अवधारणा है, जो प्रेम को केवल शारीरिक आकर्षण तक सीमित कर देती है।
संस्था के अनुसार भारतीय परंपरा ‘प्रीति’ अर्थात निरपेक्ष और आत्मिक प्रेम का संदेश देती है, जबकि वैलेंटाइन डे देहबुद्धि और उपभोगवादी मानसिकता को बढ़ावा देता है।
लेख में यह भी कहा गया है कि इस अवसर पर बाजारवाद और तथाकथित ‘डे संस्कृति’ के माध्यम से युवाओं को भटकाया जा रहा है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संस्था ने युवाओं से भारतीय संस्कृति के अनुरूप आचरण करने और ‘मातृ-पितृ पूजन’ जैसे संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया है। साथ ही, सच्चे प्रेम को आत्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।















