हाथियों से सुरक्षा के लिए क्या करें, क्या न करें: सुरक्षा को लेकर हुई बैठक

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संवाददाता। हजारीबाग।जंगल में रहने वाले लोगों के सामने अक्सर हाथियों से सुरक्षा का सवाल अहम रहा है। हजारीबाग के जिला उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिले में हाथियों की आवाजाही से उत्पन्न समस्याओं एवं उससे होने वाली घटनाओं की समीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक का उद्देश्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जान-माल की क्षति को न्यूनतम करना था।बैठक में पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी मौन प्रकाश ने बताया कि हाथियों से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए आम लोगों में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि हाथियों से हुई मृत्यु, फसलों की क्षति, अनाज भंडारण एवं मकानों के नुकसान की स्थिति में सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा का भुगतान किया जाता है।

उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों से मुआवजा भुगतान से संबंधित अंचल स्तर पर लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही, मृत्यु के मामलों में संबंधित थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर की प्रति शीघ्र वन विभाग को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा मिल सके।

स्थानीय स्तर पर हाथियों की आवाजाही की सूचना आमजन तक शीघ्र पहुँचाने के लिए माइकिंग आदि माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया। इस क्रम में डीएफओ द्वारा जानकारी दी गई कि सरकार द्वारा विकसित *“Hamar Haathi 2.0”* नामक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से हाथियों की लोकेशन की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं विशेष रूप से हाथी प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से इस एप्लिकेशन https://play.google.com/store/apps/details?id=com.kalpvaig.jktracker&pcampaignid=web_share को प्ले-स्टोर से डाउनलोड कर उपयोग करने की अपील कीया ।

जिला उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने बैठक में बताया कि हाथियों के प्रकोप से लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रशिक्षु आईएफएस को जिला नियंत्रण कक्ष का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला नियंत्रण कक्ष 24×7 संचालित रहेगी। हाथियों के आगमन से संबंधित सूचना सभी पदाधिकारी एवं प्रभावित क्षेत्र के लोग सीधे जिला नियंत्रण कक्ष को देंगे। नियंत्रण कक्ष से संबंधित क्षेत्र के मुखिया एवं ग्रामीणों को तत्काल सूचित किया जाएगा, जिससे समय रहते आवश्यक सावधानियाँ बरती जा सकें एवं प्रशासनिक कदम उठाए जा सकें।

उपायुक्त ने सभी संबंधित अंचलाधिकारियों को हाथी से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हाथियों द्वारा हुए नुकसान के लिए मुआवजा भुगतान जिम्मेदारी के साथ समय पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया कि हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को सुरक्षित एवं निर्बाध रखा जाए। इसके अतिरिक्त हाथी कॉरिडोर क्षेत्रों को अतिक्रमण-मुक्त एवं साफ-सुथरा रखने का भी निर्देश दिया गया।

हाथियों से बचने के लिए क्या करें?:-

1. हाथी आने की सूचना तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें।

2. यदि हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़ें। पहाड़ी स्थानों में सामना होने पर ढलान की ओर दौड़ें, ऊपर की ओर नहीं। सीधे न दौड़कर आड़े-तिरछे दौड़ें, कुछ दूर दौड़ने पर गमछा, पगड़ी, टोपी अथवा कोई वस्त्र फेंक दें ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रहे और आपको सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का मौका मिल जाए।

3. अगर हाथी गांव में आ ही जाता है तो मशाल के साथ कम से कम आठ-दस लोग मिलकर एक साथ ढोल या टीना पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया में भी हाथी के बहुत नजदीक न जाएं। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में रात्रि में दल बनाकर मशाल के साथ पहरा दें।

4. अगर मचान बनाकर खेत की रखवाली करनी हो, तो मचान ऊँचा बनाएं, विशेषकर उसे ऊँचे मजबूत पेड़ के ऊपर बनाएं और उसे नीचे जमीन पर लकड़ी से आग जलाये रखें।

5. हाथी जिस जंगल में दिखे उस क्षेत्र में चारा, जलावन एकत्र करने नहीं जाएं। हाथी जिन क्षेत्रों में हो उसके आस-पास के गांवों में संध्या से प्रातः काल तक आवागमन से बचें।

6. हाथी द्वारा कान खड़े कर, सुंढ़ ऊपर कर आवाज देना, इस बात का संकेत है कि वह आप पर हमला करने आ रहा है। अतः तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाए।

7. हाथियों की सूंघने की शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। अतः हाथी को भगाने के क्रम में हवा की दिशा का ध्यान रखें।

8. वैज्ञानिक प्रयोग के आधार पर पाया गया है कि मधुमक्खियों के गुनगुनाने की आवाज हाथियों को भगाने में सहायक साबित होती है।

हाथियों से बचने के लिए क्या न करें?:-

1. हाथी के चारों ओर कौतुहलवश भीड़ न लगाएं। हाथियों के चलने दौड़ने की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। अतः हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाएं रखें। बच्चों, स्त्रियों एवं वृद्धों को कभी भी हाथी के समक्ष नहीं जाने दें।

2. हाथियों को छेड़े नहीं, विशेषकर उन पर पत्थर, तीर, जलता हुआ टायर या मशाल आदि फेंककर प्रहार न करें। पटाखें आदि का प्रयोग से हाथियों को गुस्सा आ सकता है एवं इससे क्षति की संभावना बढ़ सकती है, अतः इसके प्रयोग से बचें।

3. हाथियों को अनाज अथवा अन्य खाद्य सामग्री न दें, क्योंकि इससे उनकी खाद्य सामग्री के प्रति रूचि बढ़ेगी एवं इस कारण वे मकानों को तोड़कर खाद्य सामग्री प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र में जिस कमरे में अनाज का भंडारण हो उसमें न सोएं एवं कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर अनाज को रख दें।

4. क्षेत्र में जबतक हाथी रहे, तबतक हड़िया या देशी शराब (महुआ) नहीं बनाएं। इसका भंडारण भी न करें। हाथी शराब की ओर आकर्षित होते हैं और प्राप्त करने के उद्देश्य से ये घरों को क्षति पहुँचाते हैं।

5. गर्भवती हथिनी अथवा नवजात शिशु के साथ होने पर हथिनी या उसके झुण्ड को भगाने का प्रयास न करें, उसे थोड़ा समय दें।

6. हाथियों को भगाने के क्रम में श्वेत वस्त्र या लाल वस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग उन्हें चिड़चिड़ा बनाता है।

7. हाथी को देखकर पूजा या प्रणाम करने के उद्देश्य से उनके नजदीक न जाएं।

बैठक में पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन, उप विकास आयुक्त रिया सिंह, नगर आयुक्त ओमप्रकाश गुप्ता, अपर समाहर्ता संतोष सिंह, प्रशिक्षु आईएएस आनंद शर्मा, प्रशिक्षु आईएफएस, बरही एसडीओ जोहन टुडू सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

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