महाशिवरात्रि: जाने…बिहार के शिव-शक्ति धामों को

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mahashivratri 2026 शिव-शक्ति सर्किट

इशिता स्वाति.​बिहार की मिट्टी की तासीर ही कुछ ऐसी है कि यहाँ के कण-कण में शिव का वैराग्य है और हर कदम पर शक्ति का साया। इस बार की महाशिवरात्रि पर अगर आप वही पुराना रूटीन छोड़कर कुछ खास करना चाहते हैं, तो बिहार का ‘शिव-शक्ति सर्किट‘ आपके लिए एक जबरदस्त सफर हो सकता है।
यह सिर्फ मंदिरों के दर्शन नहीं, बल्कि उस भरोसे की यात्रा है जो हमारे दादा-परदादा के ज़माने से चला आ रहा है।

​सोचिए, अगर आप अपनी शुरुआत कैमूर के मुंडेश्वरी धाम से करें, तो ऐसा लगेगा जैसे वक्त पीछे मुड़ गया हो। यह भारत का वो सबसे पुराना मंदिर है जहाँ सदियों से पूजा की लौ जल रही है।यहाँ शिव और शक्ति का एक साथ होना हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी में तालमेल ही सब कुछ है।
फिर जब आप गया के बाबा कोटेश्वरनाथ पहुँचेंगे, तो वहाँ का ‘सहस्र शिवलिंग’ देख कर सच में दिमाग चकरा जाएगा, एक ही पत्थर पर बनी वो नक्काशी देखकर लगता है कि हमारे पूर्वजों के पास क्या गज़ब का हुनर था!
​सफर में थोड़ा और आगे निकलें, तो लखीसराय का अशोक धाम अपनी एक अलग ही कहानी सुनाता है।1977 की बात है, जब अशोक नाम का एक छोटा बच्चा खेल रहा था और अचानक उसे महादेव का ये विशाल शिवलिंग मिला। आज वही जगह लाखों लोगों की उम्मीद का ठिकाना है।
वहीं सुल्तानगंज में गंगा की लहरों के बीच सीना ताने खड़ा अजगैबीनाथ मंदिर देखना अपने आप में एक सुकून है। यहीं से तो कांवड़िए गंगा जल भरते हैं और बाबा धाम की उस कठिन यात्रा का संकल्प लेते हैं।
उत्तर बिहार की ओर बढ़ें, तो मधेपुरा का सिंहेश्वर स्थान और सारण का महेंद्रनाथ मंदिर आज भी नेपाल तक के भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं।

​पर सच कहूँ, तो शिव की बातें तब तक पूरी नहीं होतीं, जब तक हम ‘शक्ति’ की चर्चा न कर लें। दरभंगा का श्यामा माई मंदिर मुझे हमेशा हैरान करता है, एक श्मशान की ज़मीन पर बना यह मंदिर सिखाता है कि माँ की ममता के आगे मौत का डर भी कुछ नहीं।
वहीं गोपालगंज की थावे भवानी के दरबार में जो सुकून मिलता है, वो शायद ही कहीं और मिले। लोग कहते हैं कि यहाँ माँ अपने भक्त रहशु की पुकार सुनकर खुद चलकर आई थीं।अगर आप सहरसा या मिथिलांचल की तरफ निकलें, तो वहाँ शक्ति की साधना का एक अलग ही नशा है।
बिराटपुर का चंडी स्थान और महिषी का उग्रतारा स्थान ऐसी जगहें हैं जहाँ पैर रखते ही मन की सारी उलझनें मानो हवा हो जाती हैं।
सहरसा का मत्स्यगंधा मंदिर अपनी बनावट के लिए जाना जाता है, तो सारण का आमी मंदिर और पटना का अपना शीतला माता मंदिर आज भी हर दुख-बीमारी में हमारी आखिरी उम्मीद बना हुआ है।

महाशिवरात्रि  महज़ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक बुलावा है उन पगडंडियों पर चलने का जहाँ हमारे अपनों की आस्था के निशान आज भी ताज़ा हैं। इस बार निकल पड़िए बिहार की इन गलियों में, जहाँ हर मंदिर की अपनी एक अलग खुशबू है और हर शिवलिंग के पास सुनाने को अपनी एक जादुई कहानी।

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