संवाददाता।पटना।होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है। यह वह समय है जब लोग अपने दिल हल्के कर लेते हैं और चेहरे अपने आप मुस्कुरा उठते हैं। फाल्गुन की पूर्णिमा के पास आते ही हवा में हल्की मिठास महसूस होती है।
सुबह की धूप नरम लगती है, पेड़ों पर नई पत्तियाँ झाँकती हैं और घरों में पुआ और दही बड़े जैसी मिठाइयों की खुशबू फैल जाती है। यह माहौल लोगों को आपस में जोड़ता है।
होलिका दहन की रात खास होती है। इस दिन आग की लपटें उठाई जाती हैं और प्राचीन कथा याद की जाती है। हिरण्यकशिपु एक अहंकारी राजा था जो चाहता था कि लोग केवल उसे ही पूजें। प्रह्लाद, उसका पुत्र, भगवान विष्णु का नाम जपता रहा।
होलिका को आग से न जलने का वरदान मिला था, लेकिन जब उसने प्रह्लाद को लेकर आग में बैठना चाहा तो प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई।
यह घटना सिखाती है कि सच्चाई की हमेशा जीत होती है। इस रात आग में लकड़ियाँ डालते समय लोग मन ही मन अपने गुस्से, ईर्ष्या और बुराई को जलाने का संकल्प लेते हैं।
होली का एक और पहलू ब्रज से जुड़ा है। कृष्ण और राधा की कहानियाँ आज भी प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि कृष्ण को अपने साँवले रंग को लेकर संकोच था। उनकी माँ ने हँसकर कहा कि राधा के गालों पर रंग लगा दो।
इसी कारण होली प्रेम और अपनत्व का प्रतीक बन गई। रंग लगाने का रिवाज केवल चेहरे तक सीमित नहीं है, यह रिश्तों को करीब लाने का प्रतीक भी है।
इसके साथ ही शिव और कामदेव की कथा भी होली से जुड़ी हुई है। सती के निधन के बाद, भगवान शिव ने गहन ध्यान में लीन होकर संसार से अपना ध्यान हटा लिया। देवी पार्वती ने शिव का ध्यान भंग करने और उन्हें संसार में सक्रिय करने के लिए कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने प्रेम का बाण चलाया और शिव का ध्यान भंग हो गया। क्रोधित शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया।
हालांकि, इससे शिव पार्वती के प्रति प्रेम में लीन हो गए और संसार में सामान्य स्थिति पुनः स्थापित हुई। कहा जाता है कि इसी घटना के स्मरण में दक्षिण भारत में लोग कामदेव के बलिदान की पूजा करते हैं। यह कथा सिखाती है कि इच्छा और प्रेम स्वाभाविक हैं, लेकिन संयम और बलिदान भी जरूरी हैं।
होली हर साल आती है और लोगों को याद दिलाती है कि पुराने गिले-शिकवे छोड़ दें, एक-दूसरे को गले लगाएँ और खुशियाँ बांटें।
रंग दो दिन में उतर जाते हैं, लेकिन अपनापन लंबे समय तक साथ रहता है। यही होली की सबसे बड़ी खूबसूरती है।















