मौनी अमावस्या:विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में लोगों ने किया गंगा स्नान

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संवाददाता। पटना।मौनी अमावस्या के अवसर पर बिहार के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा स्नान किया।
पटना के दानापुर से लेकर पटना सिटी तक के विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा स्नान किया।
कटिहार जिले के मनिहारी, बरारी, कुर्सेला स्थित गंगा नदी तथा बेगूसराय जिले के सिमरिया स्थित गंगा नदी के किनारे बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा स्नान किया।
सिमरिया घाट, भारतीय उपमहाद्वीप के मिथिला क्षेत्र में हिंदू धर्म में पवित्र स्नान के लिए एक पवित्र स्थान है जिसे गंगा स्नान के नाम से जाना जाता है । यह भारत के बिहार राज्य में बेगूसराय जिले के बरौनी थर्मल पावर स्टेशन के पास गंगा नदी के तट पर स्थित है।
1871 करोड़ की लागत से बना सिमरिया स्थित नया पुल एशिया का दूसरा सबसे चौड़ा (34 मीटर) मल्टी-स्पैन एक्स्ट्राडोज केबल-स्टेंड रिवर ब्रिज है,जो सिंगल पियर्स पर है।औंटा (मोकामा)-सिमरिया (बेगूसराय) 6 लेन मुख्य ब्रिज की लंबाई 1865 मीटर है, जबकि एप्रोच रोड समेत इसकी लंबाई 8.15 किलोमीटर है। ये ब्रिज उत्तर और दक्षिण बिहार को सीधा जोड़ेगा
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है,क्योंकि इससे सभी पाप धुल जाते हैं।मन शुद्ध होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से चंचल इंद्रियां शांत होती हैं। नकारात्मकता दूर होती है और पितरों को शांति मिलती है।जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।यह स्नान आत्म-शुद्धि और एकाग्रता बढ़ाता है और इसे दान-पुण्य के साथ करने पर विशेष फलदायी माना जाता है।
विगत 22 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा गंगा नदी पर बने 1.865 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले पुल सहित आंटा-सिमारिया परियोजना का उद्घाटन किया।
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का महत्व:-
ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।
आत्म-शुद्धि: मौन रहकर स्नान करने से मन की अशुद्धियाँ, नकारात्मक प्रवृत्तियाँ और अशांति दूर होती हैं, जिससे आत्मा को शुद्धता और शांति मिलती है।
‘मौनी’ शब्द ‘मौन’ से आया है।इस दिन मौन व्रत के साथ स्नान करने से चंचल इंद्रियाँ शांत होती हैं और मन एकाग्र होता है। तर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं:-
इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह स्नान मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान करते समय मन में पवित्र विचार रखें और मौन व्रत का पालन करें। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करें।
घर पर स्नान:- यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है, जो तन और मन दोनों को पवित्र करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

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