टेलीमेडिसिन से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा चिकित्सकीय परामर्श-मुख्यमंत्री

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संवाददाता.पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवायें भी उपलब्ध रहेंगी। वन्डर एप्प की मदद से गर्भवती महिलाओं को इलाज में काफी सुविधा होगी। इसका शुभारंभ दरभंगा से हो गया है और इसे अन्य जगहों में भी शुरु किया जाएगा।

रविवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा, अष्विन पोर्टल, वंडर एप्प एवं रेफरल ट्रांसपोर्ट टैकिंग सिस्टम के शुभारंभ  के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री के समक्ष जीविका दीदी की रसोई का राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के साथ एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किया गया। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी0 एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किये।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई प्रगति हो रही है, जिससे आप सभी लोग अवगत हुए हैं। वर्ष 2005 के पहले स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या स्थिति थी, आप सभी अवगत हैं। वर्ष 2006 के फरवरी में हमलोगों ने पहला सर्वे कराया, जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया। जरुरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। साथ ही मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुनः सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन प्रतिमाह इलाज के लिए 1 हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गरीब परिवारों को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के रुप में परिणत किया जा रहा है, जहां 30 बेड की व्यवस्था की गई है। अनुमंडल अस्पतालों में 75 बेड की व्यवस्था की गई है। सभी अस्पतालों के भवनों को भी ठीक किया जा रहा है। नई टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अनुमंडल अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों से लिंक कर देंगे और वहीं पर सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी और जरुरत के अनुसार मरीजों का बेहतर इलाज किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं जिसकी जानकारी लोगों को सोशल मीडिया के माध्य्म से एवं मीडिया के जरिये दी जाय। रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की आज शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग ससमय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है, उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की भी शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले पूर्णिया के धमदाहा में हमने देखा कि आशा की दीदियां एक मरीज के लिए 100 रुपये में नास्ता एवं खाना उपलब्ध करा रही हैं, हमने कहा कि इसे बढ़ाकर 150 रुपया कर दिया जाए। आज दीदी की रसोई कार्यक्रम के संचालन हेतु एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर भी किया गया है जिससे सभी सदर तथा अनुमंडलीय अस्पतालों में दीदी की रसोई स्थापित की जा सकेगी। इससे लोगों को नास्ता एवं भोजन की सुविधा ससमय उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर में दो स्वयं सहायता समूह के लोगों से हमने बात की थी। उसके बाद हमलोगों ने तय किया कि स्वयं सहायता समूह को और बेहतर बनाएंगे। वल्र्ड बैंक से कर्ज लेकर 44 ब्लॉक में हमने जीविका की शुरुआत करायी थी। उसके बाद पूरे बिहार में इसका विस्तार किया गया। गया की जीविका दीदियों से बातचीत की तो बैंक के बारे में ऋण, लेन देन से संबंधित उनकी जानकारी देखकर मैं अचंभित हुआ और मुझे बेहद खुशी भी हुई कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं उसके बाद भी इतनी बढ़िया जानकारी रखती हैं।1 करोड़ 20 लाख परिवार की महिलाएं जीविका से जुड़ गई हैं। बिहार की आर्थिक स्थिति में सुधार में जीविका की दीदियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चे-बच्चियों के हार्ट में छेद हो उनके इलाज की व्यवस्था राज्य सरकार कर रही है। राज्य सरकार अपने खर्चे से गुजरात के अहमदाबाद में ऐसे बच्चों के इलाज की मुफ्त व्यवस्था कर रही है। इसके साथ-साथ बिहार के अस्पतालों में ऐसे बच्चे-बच्चियों के इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी। हमलोगों ने संकल्प लिया कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का ऐसा प्रबंध करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के मामले में भी राज्य में बहुत काम हो रहा है। पूरे देश में जितने कोरोना के टेस्ट हुये हैं उसका 10 प्रतिशत टेस्ट बिहार में हुआ है। 10 लाख की आबादी पर जो देश में औसतन कोरोना जांच हो रही है उससे 21 हजार से अधिक जांच बिहार में हो रही है। दो खंडों के लोगों का वैक्सीनेशन शुरु हो गया है। कल नीति आयोग की बैठक थी, प्रधानमंत्री जी से हमलोगों ने चर्चा की। अगले माह से सभी का वैक्सीनेशन शुरु हो जाएगा। अगले चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और 50 वर्ष से कम उम्र के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का टीकाकरण कराया जाएगा।

सीएम ने संजीवनी के लाभार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की, जिसमें पटना जिले के पैमाल हेल्थ सब सेंटर से एएनएम माया कुमारी, पोठही की लाभार्थी रीना सिन्हा, नालंदा जिले के दीपनगर हेल्थ सब सेंटर की एएनएम पूनम कुमार तथा सिवान जिले के बरहरिया हेल्थ सब सेंटर की एएनएम नीतू कुमारी शामिल हैं।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा, वन्डर एप्प, रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम, अश्विन पोर्टल का माउस के जरिये शुभारंभ किया।

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने ई-संजीवनी तथा रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी0 ने दीदी की रसोई से संबंधित एक प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम के दौरान वन्डर एप्प पर आधारित एक वृतचित्र भी दिखाया गया।मुख्यमंत्री ने ई-संजीवनी के लिए बेहतर कार्य करने वाले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार, राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक केशवेंद्र कुमार, डॉ0 करुणा कुमारी, हेमंत कुमार, सतीश रंजन सिन्हा, शैलेश कुमार श्रीवास्तव तथा हेमंत साह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री रेणु देवी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने भी संबोधित किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के सचिव  अनुपम कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव बाला मुरुगन डी0, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार, राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक केशवेंद्र कुमार सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण, जीविका दीदियां एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुये।

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