पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का किया गया लोकार्पण

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संवाददाता.पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिन्होंने हमें आजादी दिलायी थी, हमें उनका अनुसरण करते हुए प्रेम, सौहार्द्र एवं भाईचारे का माहौल बनाकर समाज में एकजुट होकर रहना चाहिए। हमलोगों को देशहित एवं समाज हित में काम करना चाहिये।

भवन निर्माण विभाग द्वारा बख्तियारपुर में स्थापित 5 अमर शहीदों स्व0 पं0 शीलभद्र याजी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर, बख्तियारपुर), शहीद मोगल सिंह (प्रखंड कार्यालय परिसर. बख्तियारपुर), शहीद नाथून सिंह यादव (न्यू बाईपास रोड, राघोपुर, बख्तियारपुर), स्व0 डूमर सिंह (श्री गणेश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर, बख्तियारपुर), स्व0 कविराज रामलखन सिंह (डाकबंगला परिसर, बख्तियारपुर) की आदमकद प्रतिमा का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा राजभवन से राज्यपाल फागू चौहान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में लोकार्पित किया और सभा को संबोधित किया।

बख्तियारपुर ग्राम में जन्मे पं0 शीलभद्र याजी प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम बिहार विधान (धारा) सभा के सदस्य एवं राज्यसभा के पूर्व सांसद थे। पं0 शीलभद्र याजी का राजनैतिक जीवन काफी संघर्षमय रहा था। असहयोग आंदोलन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। स्व0 शीलभद्र याजी ने 1939 से 1941 तक नेता सुभाष चंद्र बोस के निकटतम सहयोगी के तौर पर भी कार्य किया था।

कल्याण बिगहा, नालंदा में जन्मे समाजसेवी स्व0 कविराज रामलखन सिंह बिहार के महान देशभक्त, समाजसेवी एवं प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किये जाते हैं। मात्र 19 वर्ष की अवस्था में उन्होंने साइमन कमीशन के भारत आने के देशव्यापी विरोध में 1929 में हिस्सा लिया था और पटना कैम्प जेल में 3 माह 15 दिन बिताए थे। नमक सत्याग्रह आन्दोलन में हिस्सा लेने के कारण दोबारा इन्हें हिरासत में ले लिया गया था और 1930 में पटना सिटी कैम्प जेल में 4 माह तक कैद रखा गया था। स्व0 कविराज रामलखन सिंह ने आयुर्वेद की चिकित्सा और समाज सेवा के माध्यम से सामाजिक प्रतिष्ठा अर्जित की थी। समाज में ‘मद्य निषेध’ के प्रति भी इन्होंने महती जागृति पैदा की थी।

बख्तियारपुर के गाँव रबाइच के रहने वाले शहीद मोगल सिंह भी 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के अप्रतिम योद्धा थे। बख्तियारपुर थाने का घेराव करने वाले देशभक्तों की टोली की अगुआई करने वालों में मोगल सिंह प्रमुख थे। बख्तियारपुर थाने में अंग्रेजों द्वारा रबाइच गाँव के लूटने-खसोटने की योजना की जानकारी मिलते ही शहीद मोगल सिंह ने थाने के समीप आग लगाकर प्रतिरोध व्यक्त किया था। अंग्रेजों ने मोगल सिंह का पीछा किया और उन पर गोलियों की बौछार कर दी। बाद में अपने घर के पास ही 22 अगस्त 1942 को वे शहीद हो गए थे।

वहीं शहीद नाथून सिंह यादव बख्तियारपुर की जमीन से जुड़े अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे। इनका जन्म घोसवरी ग्राम में हुआ था। ‘अगस्त क्रांति’ के दौरान 9 अगस्त 1942 को बख्तियारपुर थाने में झंडा फहराने के पश्चात तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा झंडे के अपमान पर देशभक्त नाथून सिंह ने उन्हें ललकारा था। नाराज थाना प्रभारी ने नाथून जी के सीने में गोली दाग दी, जिससे 12 अगस्त 1942 को वे शहीद हो गए।

इन पांच स्वतंत्रता सेनानियों में से स्व0 डूमर सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका जन्म बख्तियारपुर के करनौती ग्राम में हुआ था। आजादी की लड़ाई में वे सन 1932 एवं 1936 में 10 माह तक जेल में रहे। 1942 में जब ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ शुरू हुआ तो बख्तियारपुर में क्रांति का बिगुल फूकने वालों में स्व0 डूमर सिंह प्रमुख थे। इस आन्दोलन में अंग्रेजों ने इन्हें कैद कर लिया और लगभग 3 वर्षों तक वे जेल में रहे। जेल में दी गयी यातना के कारण हुई लीवर की बीमारी से उनकी मृत्यु हो गयी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर (पटना) में संस्थापित पांच स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं के लोकार्पण कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि स्व0 शीलभद्र याजी जी का स्वतंत्रता संग्राम में बड़ा योगदान था। नेता जी सुभाष चंद्र बोस के साथ उन्होंने देश की आजादी के लिए काम किया। बाद में केंद्र की राजनीति में रहकर सबके लिए काम करते रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महामहिम राज्यपाल द्वारा बख्तियारपुर के स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का लोकार्पण किया गया है। इन प्रतिमाओं का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा किया गया है। मैं इस कार्य के लिए भवन निर्माण विभाग को बधाई देता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बख्तियारपुर में स्थापित की गई प्रतिमाओं के लोकार्पण के लिए जब राज्यपाल महोदय से आग्रह किया तो वे बख्तियारपुर जाने को तैयार थे। कोरोना की वजह से परेशानी न हो इसलिए राजभवन से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिमा का अनावरण किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के अनावरण स्थल पर स्वतंत्रता सेनानियों के उपस्थित परिजन एवं वहां की जनता ने भी शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया है। इसके लिये मैं उपस्थित सभी लोगों को हृदय से धन्यवाद देता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म बख्तियारपुर में हुआ था, मेरे पिता जी वैद्य थे। जब हमलोग स्कूल में पढ़ते थे, उस समय पिताजी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में हमें बताया करते थे। आसपास बिहार और देश-दुनिया के बारे में जानकारी मिलती थी। आज स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा स्थापित की गई है, इससे आने वाली पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी मिलेगी। वे स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेंगे। आज की पीढ़ी जान सकेगी कि इस देश की आजादी के लिए कितना त्याग किया गया था।

प्रतिमा लोकार्पण कार्यक्रम को भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने भी संबोधित किया।इस अवसर पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य उदयकांत मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, राज्यपाल के सचिव  राबर्ट एल0 चोंग्थु, भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे, जबकि कार्यक्रम स्थल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनप्रतिनिधिगण एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

 

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