तेजस्वी या तेजप्रताप को सीएम की कुर्सी सौंप दें नीतीश-सुशील मोदी

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संवाददाता.पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राष्ट्रीय राजनीति में उतरने से पहले तेजस्वी प्रसाद यादव या तेजप्रताप यादव को मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपने की सलाह दी है. मंगलवार को  मोदी ने जनता दरबार के बाद संवाददाताओं से कहा कि नीतीश की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का खामियाजा बिहार क्यों भुगते? उनके जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की हालत बद से बदतर हो गई है. नीतीश को जनादेश बिहार की चिंता करने के लिए मिला है लेकिन वे राष्ट्रीय राजनीति के लिए मशक्कत करने लगे.
मोदी ने कहा कि नीतीश ना तो बिहार पर ध्यान दे पा रहे हैं और ना ही राष्ट्रीय राजनीति में खुलकर उतर पा रहे हैं. इसी चक्कर में कानून-व्यवस्था की हालत खराब हो गई है. बेहतर होगा कि लालू प्रसाद के पुत्रों में से किसी एक को सीएम बना दें.वैसे भी राजद को जदयू से अधिक सीटें मिली हैं.उन्होंने कहा कि मोकामा में एएसआई की गोली मार कर हत्या हो गई. छपरा कोर्ट में बम विस्फोट हो गया. हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से जवाब-तलब किया है. नीतीश पूर्ण शराबबंदी के बाद अपराध घटने का दावा कर रहे हैं और दूसरी ओर बेखौफ अपराधी एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. बिहार की पुलिस यह समझ नहीं पा रही कि वह शराबबंदी लागू करे या अपराध पर नियंत्रण लगाए. पिछले हफ्ते पटना में दिनदहाड़े दवा व्यवसायी की हत्या की दी गई. मुजफ्फरपुर में सुरज तुरहा नामक एक बंदी की कोर्ट परिसर में हत्या हो गई. इन सबके बावजूद नीतीश कुमार कह रहे हैं कि शराबबंदी के बाद बिहार में अपराध कम हुआ है. नई सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर होती जा रही है.
पूरे देश में बिहार की नाकारात्मक छवि बनी है. गर्वनेंस समाप्त हो गया है.  पूर्ण शराबबंदी के बावजूद बिहार में मिलिट्री कैंटिन से शराब की उपलब्धता पर सवाल है. मिलिट्री कैंटिन कोई राज्य की सीमा के अंदर नहीं है. मुख्यमंत्री अपने वायदे पर अडिग रहे. 2012 में गुटखा पर रोक लगाया गया. इसे आगे बढ़ाते हुए 2014 में सुगंधित सुपारी, तम्बाकू और जर्दा तथा पान मसालों पर भी रोक लगा दिया गया. मगर आज धड़ल्ले से बिक रहा है. सरकार को खैनी, बीड़ी और सिगरेट जो मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है पर भी रोक लगाने पर विचार करना चाहिए.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संघमुक्त भारत के बयान पर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि वह सिद्धांतहीन व अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं. 13 मई, 2016 को संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवरकर जी के जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में नीतीश कुमार शामिल हुए. वहां करीब डेढ़ घंटे तक रहे और भाषण भी दिए संघ वही है, भाजपा भी वहीं है. भाजपा के साथ 17 वर्षों तक रहे तब संघमुक्त भारत का ख्याल नहीं आया. भाजपा के सहयोग से केन्द्र में रेलमंत्री और बिहार में तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बने तब भी ख्याल नहीं आया. दरअसल अब लालू प्रसाद और नीतीश कुमार में होड़ मची है. जिस तरह से लालू प्रसाद की कोई भी बात संघ की चर्चा किए बिना पूरी नहीं होती है उसी तरह से नीतीश कुमार भी आजकल संघमुक्त भारत की बात कर लालू प्रसाद से आगे निकलना चाहते हैं. असल में यह नीतीश कुमार की सिद्धांतहीन व अवसरवादी राजनीति है.

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