सनातन संस्कृति समागम के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रण

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Draupadi Murmu

संवाददाता.पटना/बक्सर.केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बक्सर में आयोजित होने वाले सनातन संस्कृति समागम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का आमंत्रण दिया है।
ज्ञात हो कि 7 नवम्बर से 15 नवम्बर-2022 को अहिरौली (सरस्वती विद्यामंदिर के निकट ) बक्सर में श्रीराम कर्मभूमि न्यास ,सिद्धाश्रम (बक्सर) द्वारा सनातन-संस्कृति समागम व श्री वामनेश्वर श्रीराम कर्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महाकुंभ व अंतरराष्ट्रीय संत समागम का आयोजन किया जा रहा है।  तुलसीपीठ के संस्थापक, पद्मविभूषण, जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य, परम पूज्य लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी, स्वामी अनंताचार्य जी महाराज, परम पूज्य चिन्ना जीयर स्वामी सहित देश के विभिन्न मठ मंदिरों से साधु संतों का आगमन होगा। 8 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय संत सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। जिसके मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ सरचालक मोहन भागवत रहेंगे।
भेंट के दौरान केंद्रीय मंत्री चौबे ने राष्ट्रपति को बक्सर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहलू से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम की बक्सर कर्मभूमि रही है। इसे सिद्धाश्रम के नाम से जाना जाता था। महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि थी। भगवान विष्णु ने वामन के रूप में इसी धरती पर अवतार लिया था। बक्सर में ही भगवान श्रीराम ने तारका का वध किया था।
केंद्रीय मंत्री चौबे ने बताया कि राष्ट्रपति जी ने वनवासी बंधुओं में भगवान श्रीराम और माता सीता को लेकर कई प्रेरक प्रसंगों से भी अवगत कराया। उन्होंने बक्सर की दिव्य भूमि पर आने की इच्छा जाहिर की। समागम के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने बताया कि समागम एवं संत सम्मेलन का उद्देश्य बक्सर आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में पूरे देश में पहचाना जाए, इसके लिए प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष प्रयास से रामायण सर्किट में बक्सर जुड़ गया है। भारत गौरव ट्रेन के माध्यम से यहां देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु इस दिव्य भूमि का दर्शन भी किए हैं। दक्षिण भारत से श्रद्धालु बक्सर में आने भी लगे हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। बक्सर में नियमित रूप से बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए समागम मील का पत्थर साबित होगा। भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों से भी बड़ी संख्या में समागम में प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

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