व्हाट्सएप पर अधिकारी देते हैं आदेश,गिरती है गाज कनीय कर्मचारी पर

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संवाददाता.पटना.पटना जिला परिवहन कार्यालय में अधिकारियों के मौखिक व व्हाट्सएप आदेश के कारण हुए घोटाले के उजागर होने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं अन्य विभागों में भी इसी प्रकार पदाधिकारियों द्वारा व्हाट्सएप से आदेश क्यों दिए जा रहे हैं?कल वहां भी गड़बड़ी हुई तो अधीनस्थ कर्मचारी-पदाधिकारी पर गाज गिरा दी जाएगी। शिक्षा विभाग में तो अधिकांश कार्य  अधीनस्थ कर्मचारियों- शिक्षकों को इसी प्रकार व्हाट्सएप पर आदेश देकर करवाए जा रहे हैं साथ ही कार्य नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि जिला परिवहन कार्यालय में राजस्व जमा किए बगैर स्मार्ट कार्ड निकालने के मामले में संविदा पर कार्यरत डाटा इंट्री ऑपरेटरों ने डीटीओ को स्पष्टीकरण दिया है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। विभागीय पदाधिकारी के मौखिक और व्हाट्सएप के माध्यम से मिलने वाले आदेश के तहत स्मार्ट कार्ड निकाला गया है।नोटिस पाने वाले डाटा इंट्री ऑपरेटरों ने स्पष्टीकरण में लिखा है कि वाहनों का निबंधन, हस्तांतरण, द्वितीय प्रति, एचपी आदि कार्य से संबंधित स्मार्ट कार्ड प्राप्त नहीं होने पर आपके साथ प्रधान सहायक, प्रोग्रामर सहित अन्य पदाधिकारियों के पास लोग शिकायत करते हैं। इसके निराकरण के लिए पदाधिकारियों के द्वारा बिना शुल्क स्मार्ट कार्ड निकालने का निर्देश मौखिक, व्हाट्सएप, मोबाइल पर फोन कर दिया जाता है। किसी कर्मी को भेजकर भी यह निकलवाया जाता है।
जानकार बताते हैं कि पूरा शिक्षा विभाग व्हाट्सएप माध्यम से आदेश पर चल रहा है।कुछ विभागीय पत्र पत्रांक व दिनांक वाले स्कैन पत्र होते हैं लेकिन अधिकांश आदेश प्रखंड व अंचल का व्हाट्सएप ग्रूप पर बिना पत्रांक व दिनांक के दिए जा रहे हैं।साथ ही आदेश अनुपालन में कोताही बरते जाने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी जा रही है।
गौरतलब है कि लगभग दो वर्षों पूर्व ही छत्तीसगढ के तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने एडीएम को सौंपे ज्ञापन में अपनी विभिन्न मांगों के साथ-साथ आला अधिकारियों द्वारा व्हाट्सएप पर दिए जा रहे आदेश व निर्देश पर आपत्ति की थी।कर्मचारियों का कहना था कि इसमें सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर,पत्रांक व दिनांक का ल्लेक नहीं होता जिसके कारण संशय की स्थिति बनी रहती है।
इसके अलावा जानकार बताते हैं कि इसके संबंध में सरकारी कम्यूनिकेशन गाईड लाईन भी जारी किए गए हैं।सरकार ने अधिकारियों को पहले ही सचेत कर रखा है कि व्हाट्सएप व टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया ऐप्स पर किसी प्रकार की गोपनीय जानकारी व दस्तावेज साझा नहीं किए जांए।

 

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