एनडीए सरकारों की देन है पोलियो से कोरोना तक की वैक्सीन- संजय जायसवाल

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संवाददाता.पटना. फेसबुक पोस्ट के जरिये भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष को सच का आइना दिखाया.उन्होंने लिखा कि अपने मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी जीवन से लेकर 2014 तक एक वैक्सीन के बारे में भी नहीं जान पाया जो दुनिया में आने के बाद कम से कम 15 साल के अंतराल के बिना भारत में आया हो। सभी के लिए पोलियो वैक्सीन मदन लाल खुराना और डॉक्टर हर्षवर्धन ने आम जनता को उपलब्ध कराया, हेपेटाइटस-बी वैक्सीन अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज द्वारा लाए गये, पेंटावेलेंट और न्यूमोकूकल वैक्सीन माननीय नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा की देन है। वहीं टीकाकरण में 201 पिछड़े जिलों में मिशन इंद्रधनुष चलाकर उनको शहरों के मुकाबले खड़ा करने का काम माननीय जेपी नड्डा जी ने किया।
चुनौती देते हुए उन्होंने लिखा कि अगर कोई एक भी वैक्सीन जानता हो जो विश्व में आने के बाद 15 साल के भीतर कांग्रेस पार्टी द्वारा भारत में लाया गया हो तो कृप्या मेरा ज्ञान बढ़ाएं।कोरोना वैक्सीन एकमात्र वैक्सीन है जो पूरी दुनिया के मुकाबले हम 3 महीने के भीतर भारतीयों को देने में सफल हुए। भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से अपने नागरिकों को वैक्सीन देने वाला देश है, टीकाकरण में 18 करोड़ का आंकड़ा हम पार कर चुके हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा कि आज हम अपने खुद का रिसर्च किया हुआ कोवैक्सीन 90 लाख बना रहे हैं। मार्च में ही फेज थ्री की मिली फाइनल रिपोर्ट के मुताबिक हम जुलाई में छह करोड़ और अक्टूबर में 12 करोड़ कोवैक्सीन बनाने लगेंगे।
जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा कि कोविशिल्ड विदेश की कंपनी एस्ट्राजेन्का का रिसर्च है और इसका निर्माण भारत में होता है। कुछ कच्चा माल एस्ट्राजेन्का देती है और इसलिए हमें एक निर्मित वैक्सीनों एक निश्चित संख्या उन्हें देनी पड़ती है जो बाद में विदेशों में जाता है। लेकिन निरंतर हो रहे प्रयासों से यह भी अगले 4 महीनों में 11.5 करोड़ हर महीने बनना शुरू हो जाएगा।
उन्होंने लिखा कि सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की अपनी एक और वैक्सीन भी जुलाई में आ जाएगी। इसके अलावा कैडिला और बायोलॉजिकल इवान्स जैसी भारतीय कंपनियों की वैक्सीन जुलाई में आ जाएगी। यह सब तब संभव हो सका है जब मोदी जी की सरकार ने रिसर्च के लिए टैक्स और विभिन्न सुविधाएं दी हैं वर्ना कांग्रेस सरकार में रिसर्च मे खर्च पैसों पर भी पूरा इनकम टैक्स लगता था, जिसके कारण भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी रिसर्च में नहीं बल्कि केवल माल बेचने में थी।
उन्होंने आगे लिखा कि अमेरिका में टीकाकरण की शुरुआत होने के लगभग 6 महीने बाद ही 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन मिल सका पर वहां भारत की तरह विपक्षी दलों का नाटक नहीं था इसलिए सभी अपनी बारी का इंतजार करते रहें। जुलाई महीने में हमारी उत्पादन क्षमता इतनी हो जाएगी कि हम चाह कर भी उनका उपयोग नहीं कर पाएंगे। जरूरत सिर्फ 45 दिन धैर्य रखने की है।

 

 

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