बिहार:भगवाकरण की ऐसी है तैयारी

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प्रमोद दत्त.

पटना. बड़े भाई से छोटे भाई की भूमिका में आए नीतीश कुमार असहज महसूस करने लगे हैं.बड़े भाई की भूमिका में आए भाजपा ने अपना एजेंडा चलाने के लिए पृष्ठभूमि तैयार करना शुरू कर दिया है.अगर कहें कि नीतीश सरकार पर भगवा रंग चढने लगा है तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.

बिहार में सरकार का नेतृत्व भले ही नीतीश कुमार के हाथ में है लेकिन राज्यपाल,विधान सभा अध्यक्ष,विधान परिषद के कार्यकारी सभापति जैसे संवैधानिक पदों पर भाजपा नेता का होना और मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री सहित भाजपा मंत्रियों की अधिक संख्या पहली बार बिहार में हुआ है.

बिहार विधान सभा के इतिहास में पहली बार विधान सभा परिसर में सरस्वती पूजा का आयोजन हुआ.विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा पुराने स्वंय सेवक हैं.विधान सभा के इस वर्ष की डायरी के कवर का भगवा होने को महज संयोग नहीं कहा जा सकता है.इसी प्रकार संघ पृष्ठभूमि के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद द्वारा विधान मंडल में पेश किए गए वार्षिक बजट 2021-22 में गोवंश संरक्षण एवं संबर्द्धन हेतु गोवंश विकास संस्थान की स्थापना की घोषणा की गई.जानकारों का कहना है कि यह तो महज शुरूआत है,पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव संपन्न होने के बाद भगवाकरण में तेजी आएगी.अगर इन चुनावों में भाजपा को बड़ा झटका लगा तभी इसपर ब्रेक लग सकता है.

नीतीश कुमार की बेबसी साफ दिखने लगी है.भाजपा से गठबंधन बनाए रखने के लिए नीतीश कुमार को पिछले दिनों अपना स्टैंड कई बार बदलना पड़ा है.सीएए और धारा-370 प्रकरण में स्वीकार्यता के साथ नए-नए तर्क गढने पड़े हैं.कहा गया जदयू के एजेंडे में तो नहीं था लेकिन देश के संसद ने कानून बना दिया तो कानून का पालन करना ही धर्म है.

प्रेक्षकों का मानना है कि बिहार में पहले से दूसरे और फिर तीसरे नंबर पर पहुंचे जदयू के सामने जनाधार बढाने के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष छवि को बचाए रखने की चुनौती है.पार्टी स्तर पर भारी फेरबदल किया गया. आरसीपी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष पद पर कुशवाहा को बिठाने के बाद नीतीश कुमार लगातार कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं.पहली बार जदयू में पार्टी कार्यकर्ताओं को इतनी तरजीह मिल रही है. कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया जा रहा है कि पिछले 15 वर्षों के दौरान सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएं.

केन्द्र में मजबूत मोदी-सरकार एक-एक कर अपने एजेंडे पर काम कर रही है.2024 लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा द्वारा कुछ ऐसे काम किए जा सकते हैं जिससे जदयू को या तो बैकफुट पर जाना होगा या स्वीकार्यता के लिए फिर नए तर्क गढने पड़ेंगें.सूत्रों की माने तो भाजपा समान नागरिकता कानून और जनसंख्या नियंत्रण कानून शीघ्र लाएगी. इसके अलावा असम पैटर्न पर मदरसों पर गाज और एनआरसी लागू की जा सकती है.

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चली एनडीए सरकार के दौरान कुछ ऐसे निर्णय लिए गए जिसे नहीं चाहते हुए भी भाजपा को स्वीकारना पड़ा.चाहे किशनगंज में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शाखा की स्थापना का मामला हो या महाबोधी मंदिर कमिटी (बोधगया) के गठन में नियमों का बदलाव,भाजपा को कड़ुवे घूंट पीकर स्वीकारना पड़ा.क्योंकि तब केन्द्र में भाजपा सरकार नहीं थी और बिहार में भाजपा को नीतीश की वैशाखी की जरूरत थी.बिहार में नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित कुछ मदरसों में संदेहात्मक गतिविधियां पर रोक और बिहार में बंगलादेशी घुसपैठ पर कार्रवाई भी भाजपा के एजेंडे में रहा है.लेकिन गठबंधन सरकार की मजबूरी के कारण भाजपा ने मौन साध रखा था.

भाजपा नेतृत्व को लगता है कि 2024 में पुन: केन्द्र में सरकार नहीं बनी तो उनके एजेंडे का क्या होगा.इसलिए भाजपा केन्द्र की वर्तमान मजबूत सरकार के दौरान ही सारे प्रमुख एजेंडे पर काम कर लेना चाहती है.भाजपा को लगता है कि बाद की किसी सरकार के लिए उनके निर्णय को पलटना मुश्किल होगा क्योंकि उन्हें तब बहुसंख्यक हिन्दुओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा.

बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू नेता नीतीश कुमार को भी इसका अहसास है.इसलिए अपने जनाधार को बचाए रखने के लिए पार्टी का पुनर्गठन कर कार्यकर्ताओं में विशेष तौर पर सक्रिय किया जा रहा है.

 

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सन् 1980 से पत्रकारिता. 1985 से विभिन्न अखबारों एवं पत्रिकाओं में विभिन्न पदों पर कार्यानुभव. बहुचर्चित चारा घोटाला सहित कई घोटाला पर एक्सक्लुसिव रिपोर्ट, चारा घोटाला उजागर करने का विशेष श्रेय. ‘राजनीति गॉसिप’ और ‘दरबारनामा’ कॉलम से विशेष पहचान. ईटीवी बिहार के चर्चित कार्यक्रम ‘सुनो पाटलिपुत्र कैसे बदले बिहार’, साधना न्यूज और हमार टीवी के टीआरपी ओरियेंटेड कार्यक्रम ‘पड़ताल - कितना बदला बिहार’ के रिसर्च हेड और विभिन्न चैनलों के लिए पॉलिटिकल पैनलिस्ट. संपर्क – 09431033460

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