नीतीश कुमार के बाद सीएम पद पर तेजस्वी का स्वाभाविक दावा-चितरंजन गगन

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जनता पार्टी के समय ही छात्रनेता के रूप में राजनीति शुरू करनेवाले चितरंजन गगन ने समाज सेवा को ही अपना करियर बना लिया.राजनीति में एमएलए या एमपी तक के मुकाम तो अभी तक नहीं मिली लेकिन एक राजनीतिक पहचान जरूर बनाया है इन्होंने.फिलहाल वे राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता हैं.बिहार की वर्तमान राजनीति पर आर्दशन समाचार के प्रधान संपादक प्रमोद दत्त से खुलकर बातचीत की. प्रस्तुत है विस्तृत बातचीत का प्रमुख अंश.

आदर्शन-जदयू ने नीतीश कुमार को पीएम उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू किया है.राजद क्या सोचता है?

— हर राजनीतिक दल को अपने नेता को प्रोजेक्ट करने का अधिकार है.वैसे नीतीशजी पीएम के बेहतर उम्मीदवार होंगे.उनमें पीएम बनने की सभी योग्यता व क्षमता है.

आदर्शन- लेकिन आपके दल के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने तो कहा कि जो अपने बलबूते सौ सीट जीतने की क्षमता रखता हो वही दावेदारी करे.

— रघुवंश बाबू स्वंय स्पष्ट कर चुके हैं कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है.इसके साथ साथ वे बराबर बोलते रहे हैं कि पार्टी के निर्णय को मानते रहे हैं और मानते रहेंगे.साफ है जब ऐसे मामलों में पार्टी का कोई अधिकृत निर्णय होगा तो वो उसे मानेगें.

आदर्शन- कहीं पार्टी की यह सोच तो नहीं कि नीतीशजी जाएं तो तेजस्वी यादव के लिए सीएम का रास्ता साफ होगा.

— अभी न तो कोई पीएम बनने जा रहा है और न सीएम.यह सवाल बहुत एडवांस है.ऐसे सवालों का जवाब देना अभी मुनासिब नहीं है.जहां तक तेजस्वी यादव का सवाल है तो वे उपमुख्यमंत्री हैं और नीतीशजी के बाद उनका दावा स्वाभाविक रूप से बनता है.यह भी एक सच है कि उपमुख्यमंत्री के रूप में काम के बलबूते वे लोकप्रिय हो रहे हैं.युवाओं का एक बड़ा वर्ग सीएम के रूप में उन्हें देखना चाहता है.

आदर्शन- बिहार में सीटों के बटवारे से नाराज सपा महागठबंधन से अलग हो गई.यूपी में गठबंधन को लेकर लालू-नीतीश के स्टैंड अलग अलग हैं.क्या इससे बिहार के महागठबंधन पर कोई असर पड़ेगा ?

— बिहार में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.राजद सांप्रदायिक ताकत को रोकने के लिए धर्मनिरपेक्ष मतों का किसी कीमत पर बिखराव नहीं चाहता है.अलग अलग राज्यों में अलग अलग परिस्थितियां हैं जिसे लालूजी भी स्पष्ट कर चुके हैं.

आदर्शन- शहाबुद्दीन एवं राजबल्लभ यादव प्रकरण से लगता है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है.राजद में असंतोष है.

— दोनों मामले न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े हैं.न्यायिक मामलों में पार्टी कोई हस्तक्षेप न कर सकती है और न करेगी.न्यायपालिका अपना काम कर रही है-इसपर न बोलना उचित है और न राजनीति.

आदर्शन- एनडीए में समन्वय समिति की परंपरा है.बार-बार मांग के बावजूद महागठबंधन में समन्वय के लिए ऐसी कमिटी क्यों नहीं बन रही है.

— महागठबंधन में समन्वय समिति जैसा कुछ बना तो नहीं है लेकिन महागठबंधन या सरकार के स्तर पर जो भी निर्णय लिए जाते हैं-तीनों दलों के शीर्ष नेताओं की सहमति से लिए जाते हैं. कोई एकतरफा फैसला नहीं लिया जाता है.

आदर्शन- आपने ही कहीं कहा कि राजद को कैडर की जरूरत है.तो क्या राजद अबतक कैडरविहीन है?

— राजद एक मास पार्टी है.हर क्षेत्र में हर स्तर पर जुझारू कार्यकर्ता भी हैं.लेकिन अधिकांश कार्यकर्ता तकनीकी स्तर पर प्रशिक्षित नहीं हैं.कहने का मतलब यह कि सारे कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत है.सोशल मीडिया का महत्व बढ गया है.पार्टी महसूस कर रही है कि हमारे कार्यकर्ता भी अपडेट रहें. इसलिए अब राजद कार्यकर्ताओं को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा.पार्टी के बेवसाइट पर पंचायत से राष्ट्रीय स्तर के पदधारियों की सूची उपलब्ध रहेगी.

आदर्शन- तो माना जाए कि नरेन्द्र मोदी के प्रचार के तौर-तरीके ने राजद में भी बदलाव ला दिया.

— समय के साथ साथ सबकुछ बदल रहा है.राजनीति में भी बदलाव आया है.लेकिन यह जरूरत पार्टी को अपने अनुभवों से हुआ है.जब बिहार में राजद की सरकार थी तो ढेर सारे अच्छे काम हुए.लेकिन हम अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच नहीं पहुंचा पाए.राजद के खिलाफ होनेवाले दुष्प्रचार का काउन्टर नहीं कर पाए.जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा.

आदर्शन- भाजपा ने बिहार में मध्यावधि चुनाव की संभावना व्यक्त की है.

— यह प्रायोजित तरीके से भाजपा के दुष्प्रचार का ही हिस्सा है.इससे वे भ्रम की स्थिति बनाना चाहते हैं.महागठबंधन के अंदर न तो मनभेद है और न ही मतभेद.महागठबंधन की सरकार न सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा करेगी बल्कि अगली बार भी सत्ता में वापसी करेगी और भाजपा को इससे भी बुरी स्थिति में पहुंचा देगी. अपने हताश कार्यकर्ताओं को बांधे रखने के लिए भाजपा मध्यावधि चुनाव का शगूफा छोड़ रही है.

आदर्शन- सत्ता में वापसी के बाद सिर्फ नेताओं की फौज बढी या जनाधार भी बढा है.

— राजद का जनाधार लगातार बढ रहा है.दलित,पिछड़ी,अतिपिछड़ी के साथ साथ अल्पसंख्यकों में लालूजी की लोकप्रियता बढी है.राबड़ीजी और मीसाजी के कारण महिलाओं में तो तेजस्वी-तेजप्रताप के कारण युवाओं में राजद की लोकप्रियता बढी है.

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